साथ ही दोनों पक्षों के रिटायर्ड अफसरों को भी बुला लिया जाएगा। मंगलवार को उन्होंने दोनों पक्षों को बुलाया था। उधर, कर्मचारी संगठनों ने राज्यमंत्री के बयान पर गहरी नाराजगी जाहिर की है। उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन ने कहा कि राज्यमंत्री ने कमेटी की बैठक का बायकाट करके एक तरह से प्रदेश सरकार और कैबिनेट की अनदेखी की है। एसोसिएशन ने उनके इस्तीफे की मांग की।
कर्मचारी राज्यमंत्री के रवैये से बेहद आहत हैं। वह सभी की मंत्री हैं, इसलिए उनकी तटस्थ भूमिका की अपेक्षा की जाती हैं। हम उन्हें अपना पक्ष सुनाना चाहते थे। लेकिन उन्होंने बैठक का ही बायकाट कर दिया। उनका यह रवैया बेहद गैर जिम्मेदाराना है। इससे जनरल ओबीसी कर्मचारियों में बहुत नाराजगी है। यदि उन्होंने ऐसा ही रुख अपनाया तो इसे सहन नहीं किया जाएगा।
- दीपक जोशी, प्रदेश अध्यक्ष, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
प्रदेश सरकार ने उन्हें मंत्रिमंडलीय उपसमिति का सदस्य बनाया। उन्हें मुख्यमंत्री के फैसले का सम्मान करना चाहिए। लेकिन उन्होंने बैठक का बहिष्कार करके गैर जिम्मेदारी का परिचय दिया है। उन्हें राज्यमंत्री पद पर बने रहने का अब कोई नैतिक अधिकार नहीं है।
- वीरेंद्र सिंह गुसांई, प्रदेश महासचिव, उत्तराखंड जनरल ओबीसी इंप्लाइज एसोसिएशन
उत्तराखंड एससी एसटी इंप्लाइज फेडरेशन ने राज्यमंत्री रेखा आर्य के स्टैंड का समर्थन किया है। फेडरेशन ने कहा कि एससी एसटी कर्मचारी और समाज के लोग उनके साथ खड़े हैं। रेखा आर्य का विरोध करने वालों को फेडरेशन ने कहा कि वे मंत्रियों व विधायकों को बांटने का प्रयास न करें।
फेडरेशन के प्रदेश अध्यक्ष करमराम ने कहा कि कोई यदि हमारे हित की बात करता है तो उसका विरोध किया जाना संकीर्ण मानसिकता का परिचय है। रेखा आर्य मंत्री हैं। चूंकि वे इस वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, इसलिए उनकी एससी एसटी समाज के प्रति जवाबदेही बन जाती है। उन्होंने कहा कि आरक्षित वर्ग के कई विधायक फेडरेशन के संपर्क में हैं।