दरअसल रेलवे ने ऐसे 58 ‘सुपर क्रिटिकल’ मार्गों की पहचान की है, जिन पर यात्रियों की भारी संख्या के चलते ज्यादा ट्रेन चलने से रास्ते में व स्टेशन पर ‘ट्रैफिक जाम’ सरीखी हालत रहती है। इसके निदान के लिए रेलवे को 9930 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इसी तरह 68 ‘क्रिटिकल’ मार्गों पर भी 72500 करोड़ रुपया खर्च किया जाएगा। इस काम को रेलवे ने 2021-22 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इतना पैसा जुटाना बेहद कठिन है। इसी कारण रेलवे ने यूजर डेवलपमेंट चार्ज जैसे तरीकों से पैसा जुटाने की सोची है।
स्टेशन पर ही बनेंगे फाइव स्टार होटल और रिहायशी फ्लैट
रेलवे स्टेशन पर ही अब फाइव स्टार होटल की भी सुविधा मिलेगी। आईआरएसडीसी के सीईओ एसके लोहिया ने बताया कि गांधीनगर स्टेशन पर रेलवे ट्रैक के ऊपर फाइव स्टार होटल निर्मित किया गया है और यह प्रयोग सफल रहा है। इसे अन्य स्टेशनों पर भी अपनाया जाएगा। इसके साथ ही रेलवे स्टेशन रिहायशी फ्लैट बनाकर 99 साल की लीज पर दिए जाएंगे। इन फ्लैटों की बिक्री स्टेशन पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित करने वाली कंपनी करेगी।
सर्विस मर्जर हर सूरत में होगा
रेलवे बोर्ड अध्यक्ष ने कहा कि रेलवे की 8 सर्विस को आपस में मर्ज कर एक सर्विस में बदलने का निर्णय फाइनल है और इसमें अब कोई बदलाव नहीं होगा। उन्होंने बताया कि केंद्रीय लोकसेवा आयोग को भी अब रिक्तियां नहीं निकालने को कह दिया गया है।
यह भी है तैयारी
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