हरे पौधे खुशहाली का प्रतीक होते हैं। कुछ इसी सोच के साथ 68 वर्षीय जितेंद्र गुप्ता घर के आंगन में बगिया को संवारने में लगे हुए हैं। व्यस्ततम दिनचर्या में भी वह बगिया की देखरेख के लिए पर्याप्त समय निकालते हैं। रोजाना पौधों की देखरेख करने के बाद ही वो सुकून की सांस लेते हैं। पौधों के प्रति उनका प्रेम प्रकृति प्रेमियों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है।
171 पार्क रोड लक्ष्मण चौक निवासी जितेंद्र गुप्ता का कहना है कि बगिया की देखभाल करने के बाद ही उनके दिल को सुकून मिलता है। बताया कि वह प्रतिदिन तीन से चार घंटे बगिया में बिताते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें बचपन से ही फूलों का बहुत शौक रहा है। वह जिस भी घर में रहे, वहां पौधे जरूर रखते थे। उन्हें इस मकान में आए हुए कई साल हो गए हैं। यहां सबसे पहले उन्होंने पर्याप्त स्थान में बगिया तैयार करवाई। कहा कि जिस तरह हम अपनी जरूरतों को तवज्जो देते हैं। ठीक उसी प्रकार हमें पौधों के लिए भी सोचना चाहिए। हमें पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी योगदान देना होगा।
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40 प्रकार के पौधों से महक रही बगिया
उन्होंने बताया कि बगिया में 40 प्रकार के फूलों के पौधे हैं। इसमें सदाबहार फूल, हरशृंगार, सालविया, मैरीगोल्ड, गुलदाउदी, तुलसी, क्रोटन, गुलाब, निरगुंडी, दम्बेल, गिलोय, एलोविरा व कई अन्य प्रजाति के पौधे शामिल हैं। इसमें मुख्य रूप से गुड़हल का फूल मुख्य है। बताया कि बगिया में गुड़हल की पांच प्रजातियां हैं।
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बगिया में रोजाना डेढ़ घंटे करते हैं काम
बेटे सचिन गुप्ता ने बताया कि उनके पिता सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेता परिषद के अध्यक्ष भी हैं। राजा रोड पर उनकी दुकान है। वह रोजाना सुबह-शाम तीन से चार घंटे दुकान पर बैठते हैं। दुकान में जाने से पहले वह बगिया में एक से डेढ़ घंटा काम करते हैं। शाम को भी वह समय पर आकर बगिया की देखरेख करते हैं। व्यस्ततम दिनचर्या में भी वह बगिया के लिए समय निकालना नहीं भूलते।