स्वच्छता के प्रति चिंतित चार ग्रेजुएट युवाओं ने अपने अभियान को रोजगार से जोड़कर नया आयाम स्थापित किया है।
युवाओं ने जैविक वसुधा प्राइलेट लिमिटेड के नाम से एक कंपनी बनाकर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का काम शुरू किया है।
कूड़े में निकलने वाली प्लास्टिक को पीडब्लूडी और कांच व पेपर को बाजार में बेचकर पैसा कमाएंगे। इसके बाद फूड वेस्ट से खाद बनाने का प्लांट लगाने की योजना है। लोग युवाओं के इस नजरिए की खूब सराहना कर रहे हैं।
सामाजिक संस्थाओं के साथ अभियान से जुड़े हैं
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कूड़ा कलेक्शन के लिए कंपनी शुरू करने वाले युवा रजत वर्मा, अनुपम मोल्फा, मृणाल, दिनेश चंद ने बताया कि वे स्वच्छ भारत अभियान के तहत चलने वाले कई सामाजिक संस्थाओं के साथ अभियान से जुड़े हैं।
इसी दौरान अर्द्धनगरीय ग्रामीण क्षेत्रों में कूड़ा कलेक्शन न होने की बात देखने को मिली। जहां-तहां फैले इस कूड़े को देखकर इसे रोजगार का जरिया बनाने का आइडिया आया।
अगस्त में कंपनी का पंजीकरण कराकर अब अक्तूबर के अंतिम सप्ताह में नयागांव, चंद्रोटी, भगवंतपुर, बिष्ट गांव आदि जगहों पर कूड़ा कलेक्शन का कार्य शुरू कर दिया। इसके लिए उन्होंने बैंक से पांच हजार रुपये की किस्त पर एक गाड़ी भी खरीदी है।
बीटेक, इंजीनियरिंग की है पढ़ाई
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कूड़ा कलेक्शन को कंपनी शुरू करने वाले युवाओं में रजत वर्मा, अनुपम मोल्फा, दिनेश चंद ने पौड़ी से बीटेक किया है। इसके अलावा मृणाल ने अहमदाबाद से बीई (बेचलर ऑफ इंजीनियरिंग) की पढ़ाई की है।
गरीबों और छात्रों की करेंगे मदद
डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के दौरान ये युवा घरों से पुराने कपड़े और किताबें एकत्र करेंगे। इन कपड़ों को वो गरीबों में बांटेंगे। जबकि किताबों को ऐसे छात्रों को उपलब्ध कराएंगे, जो किताबें खरीदने में सक्षम न हों।
ग्रामीण भी कर रहे सहयोग
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युवाओं के इस काम में ग्रामीण भी इनका सहयोग कर रहे हैं। सभी जनता से अपील कर रहे हैं कि कूड़ा इधर-उधर न फेंककर गाड़ी में डालें।
नयागांव की प्रधान ज्योति कोटिया, चंद्रोटी के प्रधान राकेश ठाकुर, भगवंतपुर के प्रधान रितेश जोशी, बिष्ट गांव की प्रधान ममता राणा ने बताया कि सरकार की ओर से कोई बजट की व्यवस्था न से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन नहीं कराया जा रहा था।
इन युवाओं ने आकर गांव की सफाई का जो जिम्मा लिया है, वह सराहनीय है।