दोपहर 12 बजे भोगमूर्ति को मंदिर से बाहर लाया गया। तय मुहूर्त में दोपहर 12.30 बजे भीतर अखंड ज्योति के साथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
गंगा जी की भोग मूर्ति को डोली यात्रा के साथ गंगोत्री से तीर्थ पुरोहितों के गांव मुखीमठ (मुखबा) के लिए रवाना किया गया। इस दौरान धाम मां गंगा के जयकारों से गूंज उठा। देर शाम को डोली यात्रा रात्रि विश्राम के लिए मार्कंडेय पुरी स्थित चंडी देवी मंदिर पहुंची। डोली यात्रा शुक्रवार को मुखबा पहुंचेगी।
कपाट बंद होने पर गंगोत्री विधायक गोपाल रावत, पूर्व विधायक विजयपाल सजवाण, डीएम डा. आशीष चौहान, सेकेंड महार रेजीमेंट के कमान अधिकारी कर्नल संदीप रावत, सीजेएम मिथिलेश कुमार झा, सीओ जीएल कोहली, ब्लाक प्रमुख चंदन पंवार, जिला पंचायत सदस्य कुलदीप बिष्ट, सुरेश चौहान, गंगोत्री नेशनल पार्क के वन क्षेत्राधिकारी प्रताप पंवार, मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल, सचिव दीपक सेमवाल सहित कई लोग मौजूद रहे। इस मौके पर कुपड़ा के नागदेवता की डोली के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु भी पहुंचे।
सेना एवं आईटीबीपी ने की आवभगत
गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद करने के मौके पर हर्षिल में तैनात सेना की सेकेंड महार रेजीमेंट एवं कोपांग में तैनात आईटीबीपी के जवानों ने भी श्रद्धालुओं की खूब आवभगत की। सेना की ओर से गंगोत्री में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने भोजन प्रसाद ग्रहण किया। सेना के पाइप बैंड की अगुवाई में मां गंगा की डोली यात्रा रवाना हुई।
बृहस्पतिवार को गंगोत्री मंदिर के कपाट बंद होने के मौके पर यहां पहुंचे श्रद्धालु बर्फ से लकदक धाम का नजारा देखकर गदगद् हो गए। मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने बताया कि बीते दो-तीन दशकों में यह पहला मौका है, जब कपाट बंद होने से पहले गंगोत्री में इतनी बर्फबारी हुई है।
गंगोत्री में अभी आधा फीट से ज्यादा बर्फ जमा है। उन्होंने बताया कि शीतकाल में तीर्थ पुरोहित मनोहरी प्रसाद सेमवाल एवं संतोष सेमवाल गंगोत्री धाम में मौजूद रहकर दीप प्रज्ज्वलित करेंगे, जबकि मंदिर परिसर की व्यवस्था के लिए मनमोहन भट्ट, मदन बुटोला एवं सूर्या चौहान भी धाम में ही रहेंगे। इनके अलावा दो दर्जन से ज्यादा साधु संत तथा विभिन्न धर्मशालाओं के चौकीदार भी शीतकाल में गंगोत्री में प्रवास करेंगे।
18 लाख से अधिक श्रद्घालु गए चारधाम
इस बार चारधाम के दर्शन जाने वाले श्रद्घालुओं की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मंगलवार तक 18 लाख 72 हजार 952 श्रद्घालुओं ने यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ के दर्शन किए।
वर्ष 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम जाने वाले यात्रियों की संख्या में भारी कमी आई थी। वर्ष 2014 में 20 हजार 934 श्रद्घालु ने यमुनोत्री, 25 हजार 240 ने गंगोत्री, 44 हजार 216 ने केदारनाथ और 71 हजार 039 श्रद्घालुओं ने बदरीनाथ के दर्शन किए थे। इसके बाद यात्रियों की संख्या में इजाफा हुआ और वर्ष 2015 में 92 हजार 46 श्रद्घालु ने यमुनोत्री, 1 लाख 5 हजार 98 ने गंगोत्री, 2 लाख 32 हजार 353 ने केदारनाथ और 3 लाख 2 हजार 874 ने बदरीनाथ, वर्ष 2016 में 2 लाख 12 हजार 809 श्रद्घालु ने यमुनोत्री, 2 लाख 53 हजार 716 ने गंगोत्री, 3 लाख 93 हजार 702 ने केदारनाथ और 4 लाख 2 हजार 486, वर्ष 2017 में 3 लाख 3 हजार 784 श्रद्घालु ने यमुनोत्री, 3 लाख 55 हजार 266 ने गंगोत्री, 5 लाख 60 हजार 53 ने केदारनाथ और 5 लाख 9 हजार 718 श्रद्घालुओं ने बदरीनाथ के दर्शन किए थे।
इस वर्ष यात्रियों की संख्या के सभी रिकॉर्ड टूट गए और 3 लाख 6 हजार 427 श्रद्घालु ने यमुनोत्री, 3 लाख 98 हजार 976 ने गंगोत्री, 5 लाख 81 हजार 554 ने केदारनाथ और 5 लाख 85 हजार 995 ने बदरीनाथ धाम के दर्शन किए। जिला पर्यटन अधिकारी सीमा नौटियाल ने बताया कि इस वर्ष चारधाम पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। उन्होंने बताया कि आपदा का डर अब यात्रियों के मन से खत्म हो चुका है।
2013 में केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम जाने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में भी काफी कमी आई थी। जिस कारण आपदा के एक वर्ष बाद 2014 में कुल 319 विदेशी पर्यटकों ने ही चारधाम के लिए पंजीकरण कराया था। जबकि वर्ष 2015 में 6 हजार 919, वर्ष 2016 में 7 हजार 112, वर्ष 2017 में 12 हजार 827 विदेशियों नेज पंजीकरण कराया था, लेकिन बीते वर्ष की अपेक्षा 5 नवंबर 2018 तक 11 हजार 965 विदेशियों ने ही पंजीकरण कराया है।
इस बार हेमकुंड साहिब पहुंचे कम श्रद्धालु
हेमकुंड साहिब के कपाट दस अक्तूबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे, इस वर्ष हेमकुंड जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी कमी आई है। वर्ष 2014 में 39 हजार 257, वर्ष 2015 में 75 हजार 126, वर्ष 2016 में 72 हजार 526, वर्ष 2017 में 1 लाख 25 हजार 79 श्रद्धालुओं ने हेमकुंड साहिब के दर्शन किए, लेकिन इस वर्ष 1 लाख 10 हजार 133 श्रद्धालुओं ने ही दर्शन किए।