हिंदुओं की आस्था के केंद्र गंगोत्री मंदिर पर भैरोंझाप गदेरे (बड़ा नाला) से खतरा मंडरा रहा है।
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बीते साल की आपदा में इस गदेरे में आया मलबा जस का तस पड़ा है। नाले में जमा मलबा साफ न कराए जाने से बरसात में इसका रुख मंदिर की ओर होने का खतरा है।
पहले भी कई बार भैरोंझाप गदेरे में आया मलबा और ग्लेशियर के बड़े टुकड़े गंगोत्री धाम को काफी नुकसान पहुंचा चुके हैं।
धाम की सुरक्षा की ठोस कार्ययोजना तैयार नहीं
केदारनाथ धाम की त्रासदी के बाद भी भैरोंझाप गदेरे से गंगोत्री धाम की सुरक्षा की ठोस कार्ययोजना तैयार न किया जाना हैरान करने वाला है।
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गंगोत्री मंदिर के सिरहाने 90 डिग्री ढाल वाली पहाड़ी से निकलने वाला भैरोंझाप गदेरा न सिर्फ बरसात में उत्पात मचाता है, बल्कि सर्दियों में भीषण बर्फबारी होने पर इसमें आने वाले ग्लेशियर के टुकड़े भी खतरा बनते हैं।
मंदिर परिसर में जा घुसे थे ग्लेशियर के टुकड़े
बीते साल फरवरी में इस गदेरे में आए ग्लेशियर के टुकड़े भैरव धूना को दबाते हुए मंदिर परिसर में जा घुसे थे। जून माह की आपदा के दौरान भी इस नाले में भारी मलबा एवं पानी आया था।
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हालांकि तब इससे कोई नुकसान नहीं हुआ था। जानकारों की मानें तो यदि कभी गदेरे के मोड़ वाले हिस्से से मलबा, पानी या ग्लेशियर के टुकड़े दीवार तोड़कर घुसे तो गंगोत्री मंदिर समेत दर्जनों निर्माण इसकी जद में आ जाएंगे।
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84 वर्षीय बुजुर्ग तीर्थ पुरोहित पं. हरिशंकर सेमवाल बताते हैं कि वर्ष 1968 एवं 1974 में भैरोंझाप गदेरे में आए उफान से मंदिर की चौपाल समेत कुछ अन्य निर्माण क्षतिग्रस्त हुए थे।
2008, 2010 में इस गदेरे में आया था काफी मलबा
वर्ष 2004 में भैरोंझाप एवं भागीरथी के उफान से मंदिर समिति के सत्संग हॉल, चौपाल के साथ ही कई होटल आदि निर्माण तबाह हो गए थे। वर्ष 2008, 2010 में भी इस गदेरे में काफी मलबा आया था।
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जून 2013 की आपदा के दौरान आया मलबा अभी तक भैरोंझाप नाले में जमा है। प्रशासन से कई बार इस मलबे को हटाकर सुरक्षा उपाय की मांग की गई। कोई कार्रवाई न होने से भैरोंझाप नाले से गंगोत्री मंदिर एवं धाम पर खतरा मंडरा रहा है। नाले से मलबा साफ कराना जरूरी है।
- पं. सुरेश सेमवाल, सचिव गंगोत्री मंदिर समिति
भैरोंझाप नाले से मलबा सफाई एवं मरम्मत का 23 लाख का प्रस्ताव भेजा गया है। अभी तक शासन से स्वीकृति न मिलने के कारण काम शुरू नहीं हुए हैं।
- पीएस पंवार, ईई सिंचाई विभाग उत्तरकाशी