सुप्रीम कोर्ट ने सच कहा है कि सरकारों की योजनाओं का यही हाल रहा तो गंगा दो सौ साल में भी साफ नहीं हो पाएगी।
गंगा सफाई के लिए जिम्मेदार एजेंसियों की सुस्ती की वजह से अभी तक कोई सकारात्मक नतीजा नहीं आया। गंगा में म्यूनिसपल वेस्ट मिलने के मामले में 13 नगर निकायों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। फिर भी कोई फर्क नहीं पड़ा।
उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने चिंता जाहिर की थी कि गंगा में म्यूनिसपल वेस्ट मिल रहा है। इस संबंध में ग्रामसभाओं को भी नोटिस जारी किया गया था। नगर पालिकाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। लेकिन लोकल अथॉरिटी का रोना है कि उनके पास सीवर के निस्तारण के लिए संसाधन ही नहीं हैं।
ऋषिकेश तक गंगाजल पीने लायक
बोर्ड के सदस्य सचिव विनोद सिंघल का कहना है कि बोर्ड मॉनीटरिंग अथॉरिटी है। बराबर नोटिस जारी किए जाते हैं। गंगा रिवर बेसिन कंजर्वेशन अथॉरिटी इस बात से खुश है कि ऋषिकेश तक गंगाजल पीने लायक है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जो गंदगी मिलती है, पानी में घुल जाती है। सिर्फ हरिद्वार में गंगाजल की गुणवत्ता खराब है।
गंगा में मिलने वाली मुख्य नदियां
भागीरथी, भिलंगना, अलकनंदा, ऋषिगंगा, बिरही गंगा, नंदाकिनी, पिंडर, मंदाकिनी, नयार, सौंग, गूलर, हुयाल आदि नदियां मिलती हैं। गंगा में मिलने वाली सभी नदियों से म्यूनिसपल वेस्ट आ रहा है।
13 स्थानों पर पानी की जांच
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड गंगोत्री, यमुनोत्री, साइना चट्टी, भागीरथी देवप्रयाग, अलकनंदा, मंदाकिनी समेत 13 स्थानों पर गंगा के पानी की जांच करता है।