हल्द्वानी के लाडली गैंगरेप के मामले में पुलिस अधिकारी शुरू से ही गुमराह कर रहे हैं। एडीजी की पत्रकार वार्ता में भी यह नहीं बताया गया कि घटना कहां की गई। अभियुक्तों की भूमिका क्या रही।
अधीनस्थों की लापरवाही पर पर्दा डाल रहे अधिकारी
कहीं नेताओं के करीबी डंपर मालिक तो इस मामले में नहीं घिर रहे थे। शिकायत यह थी कि पुलिस अधिकारी अधीनस्थों की लापरवाही पर भी पर्दा डाल रहे हैं।
यही कारण है कि शिकायत मिलने पर मुख्यमंत्री को सचिव स्तर की जांच बैठानी पड़ी। एडीजी कानून व्यवस्था राम सिंह मीणा ने बताया कि घटना का मुख्य आरोपी डंपर चालक अख्तर अली है।
उसके साथ पीलीभीत का चालक प्रेमपाल वर्मा और फंटोका रुद्रपुर का जूनियर मसीह शामिल रहा। डीआईजी जीएस मर्तोलिया का कहना था कि घटना में सिर्फ अख्तर शामिल था, अन्य दो नहीं।
मामला तूल पकड़ने पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ बलात्कार कर हत्या करने, साक्ष्य छिपाने और पाक्सो के तहत मुकदमा दर्ज कर दो अन्य को भी गिरफ्तार दिखाया। पुलिस अधिकारी यह मानने के लिए तैयार नहीं थे कि कही ढूंढने में चूक हुई है। वहीं, लाडली के परिजन पुलिस की कार्रवाई पर अंगुलियां उठा रहे थे।
परिजनों से पुलिस अधिकारियों ने वादा किया था कि गिरफ्तारी के बाद अभियुक्तों को उनके सामने लाएंगे, लेकिन डीआईजी या एसएसपी ने परिजनों के सामने अभियुक्तों को नहीं किया। अभियुक्तों के पकड़ने जाने पर भी उन्हें पत्रकारों के सामने भी नहीं लाया गया।
क्योंकि सामने लाने पर पुलिस की लापरवाही उजागर होने का खतरा था। इतना तय है कि कुछ पुलिसकर्मी भी सत्ता पक्ष के नेताओं के करीबी है। इस कारण अधिकारी लापरवाही के आरोप में अधीनस्थों को फंसाना नहीं चाहते थे। चर्चा है कि यदि घटना का खुलासा सही था तो मुख्यमंत्री ने लापरवाही के मामले में सचिव स्तर पर जांच कराने की घोषणा क्यों की।
एसएसपी को हटाने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम
लाडली हत्याकांड की कवरेज कर रहे पत्रकारों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में कुमाऊं भर में नैनीताल के एसएसपी सेंथिल अबुदई को हटाने की मांग जोर पकड़ने लगी है। शनिवार को हल्द्वानी रामलीला मैदान में पत्रकारों की बैठक हुई, जिसमें एसएसपी को तत्काल प्रभाव से हटाने की मांग को लेकर आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए कोर कमेटी गठित की गई।
कोर कमेटी पदाधिकारियों ने एसएसपी को हटाने के लिए सरकार को 48 घंटे की मोहलत दी है। इसके बाद पत्रकारों ने चरणबद्ध आंदोलन की धमकी दी है। लाडली हत्याकांड में पुलिस की भूमिका पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस अब तक मीडिया कर्मियों के सवालों का ठोस जवाब नहीं दे पा रही है।
इससे बौखलाई पुलिस ने शुक्रवार को एसएसपी के आदेश पर शीशमहल में मीडिया कर्मियों पर लाठीचार्ज कर दिया। इसमें 13 पत्रकारों समेत 18 लोग जख्मी हो गए। लाठीचार्ज के बाद पत्रकारों ने डीआईजी का घेराव कर पत्रकारों पर बल प्रयोग करने का कारण पूछा।
डीआईजी ने घटना पर खेद प्रकट कर पल्ला झाड़ लिया। एसएसपी का बेतुका जवाब सुनकर पत्रकार भड़क गए। एसएसपी ने स्वीकार किया कि हालात लाठीचार्ज करने के नहीं थे, लेकिन भविष्य में अराजकता का माहौल न बने इसी को देखते हुए लाठीचार्ज का आदेश दिया गया।
एसएसपी के बेतुका जवाब सुनकर पत्रकारों ने उनको हटाने की मांग शुरू कर दी। शनिवार को रामलीला मैदान में कुमाऊं भर से पत्रकार एकत्र हुए और एसएसपी को हटाने की पुरजोर मांग की।