उत्तराखंड विधानसभा में शनिवार को संसदीय मर्यादाएं तार-तार हो गई। बजट पर चर्चा के दौरान प्रदेश में किसानों की आत्महत्या के मामले पर सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों में जमकर धक्कामुक्की हुई और नौबत हाथापाई तक आ गई। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल को सात बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
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करीब ढ़ाई घंटे तक सदन में गतिरोध रहा। इस दौरान सदस्यों के बीच जमकर तू-तू मैं-मैं हुई। वे एक-दूसरे पर प्रहार करने को भी लपके। वहां मौजूदा मार्शल यदि बीच-बचाव न करे तो हालात मारपीट तक के आ सकते थे। इससे व्यथित विधानसभा अध्यक्ष को पीठ से यह कहना पड़ा कि उन्हें सदस्यों के ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं थी।
घटनाक्रम के अनुसार, सुबह सदन की कार्यवाही आरंभ हुई तो नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने बजट पर चर्चा शुरू करते हुए किसानों की आत्महत्या का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आठ किसान आत्महत्या कर चुके हैं। सरकार की नीतियां इसके लिए जिम्मेदार हैं। सरकार किसानों की आत्महत्या रोकने के उपाय करे। इसका कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय विरोध किया। वे अपने स्थान से उठ गए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस लाशों पर राजनीति कर रही है। उनके इतना कहते ही विपक्षी विधायक वेल में आ गए और नारेबाजी करने लगे।
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नौबत धक्का-मुक्की और हाथापाई की आ गई
शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे
स्पीकर ने कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय को शांत रहने के लिए कहा। लेकिन वह विपक्ष पर हमला बोलते रहे। इससे विपक्षी सदस्य और ज्यादा भड़क गए। इस बीच कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने भी मोर्चा संभाल लिया। विपक्षी विधायक वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। सत्ता पक्ष की ओर से हमले बढ़े तो कांग्रेस विधायक करन माहरा और काजी निजामुद्दीन ट्रेजरी बेंच की ओर लपके। उनके और मंत्रियों के बीच खूब बहस हुई। इस बीच अपने स्थान से उठकर भाजपा विधायक राजकुमार ठुकराल करन माहरा के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए।
माहौल और ज्यादा अशांत हो गया। नौबत धक्का-मुक्की और हाथापाई की आ गई। इस दौरान दूसरी ओर से दौड़ते हुए पूरन फर्त्याल भी इस धक्कामुक्की में शामिल हो गए। वे विपक्षी विधायकों की ओर पूरी आक्त्रस्मकता के साथ बढ़े। लेकिन मार्शलों ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इस बीच स्पीकर बार-बार शांति बरतने की अपील करते रहे, लेकिन सदस्यों पर उनकी बातों को कोई असर नहीं दिखा। उन्हें सात बार सदन कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
सुबह करीब 13 मिनट की कार्यवाही चलने के बाद 11.30 बजे से तीन बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित रही। गतिरोध खत्म करने के लिए स्पीकर के चेंबर में नेता प्रतिपक्ष, संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक के मध्य मंत्रणा हुई। लेकिन ट्रेजरी बेंच से जब यह मांग उठी कि किसानों की आत्महत्या के संबंध में नेता प्रतिपक्ष के कथन को कार्यवाही से हटा दिया जाए तो इस पर विपक्षी विधायक फिर भड़क गए। स्पीकर ने भोजनावकाश तक सदन स्थगित कर दिया। विपक्ष दो मंत्रियों पर कार्रवाई की मांग पर अड़ गया। भोजनावकाश के बाद स्पीकर ने प्रकरण का परीक्षण कराने का जब आश्वासन दिया तो गतिरोध खत्म हो गया।
मंत्रणा के बाद टूटा गतिरोध
indira hridayesh
- फोटो : amar ujala
भोजनावकाश के दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश और सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के मध्य मंत्रणा हुई। उसके बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो नेता प्रतिपक्ष ने स्पीकर से सदस्यों को हिदायत देने और खेद प्रकाशन कराने की अपील की। इस पर स्पीकर ने इसका परीक्षण कराने का आश्वासन दिया। सत्ता क्ष की ओर से कोई विरोध नहीं हुआ। नेता प्रतिपक्ष अपनी बात कहती गई और अंतत: गतिरोध टूट गया।
विधायकों से ऐसी उम्मीद नहीं थी। यह घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसी पुनर्रावृत्ति अब नहीं होनी चाहिए। - प्रेमचंद अग्रवाल, विधानसभा अध्यक्ष
सदन में असंसदीय व्यवहार हुआ। ऐसा व्यवहार आम तौर पर कहीं नहीं होता। सत्ता बल के मद में बाहें उठा-उठा कर मारपीट पर तैयार हो, ऐसा हमने कहीं नहीं देखा। उन्हें खेद प्रकट करना चाहिए। हमारे सदस्य तब गए जब वह गाली गलौज और मारपीट पर उतर आए। उनके मंत्री कूद-कूद कर बोलेंगे तो प्रतिपक्ष चूड़ियां पहनकर नहीं बैठा है। - डॉ. इंदिरा हृदयेश, नेता प्रतिपक्ष
सदन लोक तंत्र का मंदिर है। वहां ऐसी घटनाएं नहीं होनी चाहिए। - त्रिवेंद्र सिंह रावत, मुख्यमंत्री
सदन में हास परिहास भी होते हैं और आरोप-प्रत्यारोप भी। यह बात ऐसी नहीं थी, जिसे दिल पर लगा दिया जाता। -प्रकाश पंत, संसदीय कार्यमंत्री
कब से कब तक रहा सदन बाधित
11.30 से 12.00 तक
12.00 से 12.05 तक
12.05 से 12.20 तक
12.20 से 12.35 तक
12.35 से 12.50 तक
12.50 से1.10 तक
1.10 से 3.00 तक
कैंटीन संचालक को पीटा, कांग्रेस विधायकों पर इल्जाम
prem chandra agarwal
- फोटो : file photo
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान खाने की व्यवस्था देख रहे प्राइवेट संचालक की पिटाई से यहां बवाल मच गया। पिटाई का आरोप कांग्रेस के विधायकों पर लगा है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से लेकर स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल और मंत्रियों से विधायकों की शिकायत की गई है। इस मामले में फिलहाल एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। इधर, कांग्रेस विधायकों ने कैंटीन संचालक के साथ कहासुनी की बात को तो स्वीकार किया है, लेकिन मारपीट से इनकार किया है। विधायकों का कहना है कि कैंटीन संचालक ने पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
बजट सत्र के पांचवें दिन इस मामले की गूंज रही। हालांकि घटना बीती रात की बताई जा रही है। कैंटीन संचालक राजेंद्र मल्होत्रा के अनुसार, उनके पार्टनर सुजय बोस कल रात को जब कैंटीन में थे, तब कांग्रेस के विधायक हरीश धामी, करण माहरा, आदेश चौहान और मनोज रावत वहां आए। उन्होंने जल्दी से खाना देने के लिए कहा। देरी होने पर हरीश धामी ने सुजय बोस की पिटाई कर दी। बोस के सिर और अन्य जगहों पर चोट लगी है। हालांकि अभी मेडिकल नहीं कराया गया है। उन्होंने बताया कि राजकुमार ठुकराल और हरबंश कपूर आदि विधायकों ने बीच-बचाव करके बोस को विधायक से छुड़वाया।
कैंटीन संचालक का यह भी कहना है कि नेता प्रतिपक्ष ने उन्हें बुलवाकर पूरी घटना पर खेद प्रकट किया है। इधर, कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने इस बात की पुष्टि की है कि कैंटीन संचालक ने उनसे मुलाकात करके विधायक के स्तर पर पिटाई की शिकायत की है। हालांकि अभी एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। दूसरी तरफ, विधायक हरीश धामी और करन माहरा ने पिटाई करने के आरोपों को सीधे तौर पर नकारा है। उन्होंने कहा है कि पर्वतीय क्षेत्र के लोगों के लिए आपत्तिजनक टिप्पणी करने पर कहासुनी जरूर हुई थी, मगर किसी को पीटा नहीं गया है।