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एफआरआई की मरम्मत के लिए दो हफ्ते में मंजूर होगी धनराशि : जावडे़कर

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एफआरआई के सभागार में ‌डीम्ड यूनिवर्सिटी के 5वें दीक्षांत समारोह में संबोधित करते केंद्रीय मंत्?
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देहरादून। एफआरआई के बिल्डिंग की मरम्मत के लिए धनराशि की कोई कमी नहीं होगी। बिल्डिंग की मरम्मत का प्रस्ताव आने पर धनराशि दो हफ्ते में मंजूर हो जाएगी। बशर्तें बिल्डिंग के पुराने स्वरूप में कोई परिवर्तन न हो।
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ये बातें केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने शनिवार को एफआरआई डीम्ड यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में कहीं। जावड़ेकर ने कहा कि एफआरआई सुंदर कैंपस है। इसकी सुंदरता हमेशा बनाए रखना हम सभी का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि सौ साल से अधिक पुरानी बिल्डिंग की संरचना वाकई में अद्भुत है। वर्तमान में बिल्डिंग के कुछ इमारतों में मरम्मत की आवश्यकता है। इसके लिए एफआरआई की ओर से प्रस्ताव मिला है। बिल्डिंग के मरम्मत के लिए जितनी भी धनराशि की आवश्कता है, वह दो हफ्ते में मंजूर कर दी जाएगी। लेकिन बिल्डिंग की सुंदरता पर इसका प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए और कहीं भी ऐसा नहीं लगता चाहिए कि बिल्डिंग में पैच लगाए गए हों। साथ ही उन्होंने यहां मौजूद फॉरेस्ट स्मारक का भी रिनोवेशन करने को कहा।
जल्द ही चलाया जाएगा स्कूल नर्सरी का प्रोग्राम
जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र सरकार जल्द ही स्कू ल नर्सरी प्रोग्राम चलाएगी। इसका उद्देश्य बचपन से ही पेड़-पौधों के प्रति जागरूकता का भाव पैदा करना है। इसके तहत पांचवीं कक्षा के छात्रों को बीज दिए जाएंगे। बीजरोपण के बाद आठवीं कक्षा तक छात्र देखभाल करेंगे। पॉसआउट होने पर छात्रों को ट्रॉफी के रूप में यही पौधा भेंट किया जाएगा। इसके बाद छात्र यह पौधा अपने घर या पड़ोस में लगा सकेंगे।
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फारेस्टर रोज कर रहे 10 किमी वन क्षेत्र का भ्रमण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि फारेस्टरों को एक स्मार्ट मोबाइल दिया है। जिसमें एक एप के जरिए उन्हें मंत्रालय से जोड़ा गया है। यह एप के माध्यम से यह सुनिश्चित होगा कि एक दिन में फारेस्टर ने कितने किमी फारेस्ट एरिया क वर किया। रिपोर्ट के मुताबिक फारेस्टर रोज करीब 10 किमी वन क्षेत्र में भ्रमण कर रहे हैं।
पहले जंगल थे और खरीदनी पड़ रही लकड़ी
जावेड़कर ने कहा कि हमारे देश में कुछ ऐसे कानून बने हैं, जिसकी वजह से लोगों ने पेड़ लगाने ही बंद कर दिए हैं। इसके लिए उन्होंने चंदन की लकड़ी क ा उदाहरण दिया। कहा कि पहले हमारे यहां चंदन के जंगल होते थे, लेकिन अब हमें चंदन ऑस्ट्रेलिया से खरीदना पड़ रहा है। इसलिए सरकार अब लगाओ, उगाओ और यूज करो की नीति पर काम कर रही है।
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