अंग्रेजों को अलग और हिंदुस्तानियों को अलग रखा गया। हिंदुस्तानियों को गांधी के आदमी के नाम से पुकारा जाता था। जेल से बाहर आने के बाद देश के लिए लड़ाई लड़ते हुए बैंकाक होते हुए वह रंगून पहुंचे। यहां भी उन्हें जियाबाड़ी और वर्मा की जेलों में बंद होना पड़ा। इस दौरान उन्होंने कई यातनाएं सहीं। देश की आजादी से कुछ समय पहले वह घर आए।
दिवंगत स्वतंत्रता सेनानी पदम सिंह कोरंगा को तत्कालीन दिवंगत प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने वर्ष 1985 में दिल्ली में सम्मानित किया था। नौ नवंबर 2001 को देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में तत्कालीन मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी ने उन्हें सम्मानित किया था।
तत्कालीन मुख्यमंत्री बीसी खंडूरी ने भी उन्हें ताम्रपत्र और 20 हजार रुपया नकद भेंट किए थे। 09 अगस्त 2014 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम और इसी तरह 26 जनवरी 2015 को तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें सम्मानित किया था।