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देखें, धन बटोरने को सफेदपोशों ने कैसे बदले किरदार

Fri, 25 Sep 2015 01:43 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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लग्जरी कारों पर लोन के नाम पर करोड़ों रुपए डकराने वाले सफेदपोश बैंकों में बार-बार किरदार बदलते रहे हैं। कभी ऋण आवेदक तो कभी गारंटर बनकर बैंकों को चूना लगाते रहे।
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शातिरों ने लोन पास कराने के लिए कभी पत्नी, बेटे तो कभी पुत्रवधु से लेकर दूसरे साथियों तक के नाम का सहारा लिया। सितंबर से लेकर फरवरी तक गिरोह ने कार लोन की झड़ी लगा दी। राष्ट्रीय कृत बैंकों में कार पर लोन की प्रतिर्स्पधा किसी से छिपी नहीं है।

हर बैंक अपनी लोन स्कीम से ग्राहकों को प्रभावित करना चाहता है। दूसरे ऋण के मुकाबले यह काफी आसान भी है, जो 10 से 15 दिन की अवधि में मिल जाता है। राजपुर रोड की नैनीताल बैंक शाखा से लिए गए लोन की लिस्ट पर नजर डाले तो साफ हो जाएगा कि सरकारी धन हड़पने की जालसाजों को कितनी जल्दी थी।
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एक सवाल और पुलिस को खटक रहा है कि आखिरकार जालसाजों को नैनीताल बैंक की राजपुर शाखा ही क्यों रास आई। क्या यहां किसी से कोई सांठगांठ थी, यदि ऐसा नहीं था तो कभी ऋण आवेदक तो कभी गारंटरे बनकर आने वाले लोगों पर बैंक प्रबंधन ने शक क्यों नहीं जताया।

क्या था मामला
स्पेशल टास्क फोर्स ने बुधवार को बिना लग्जरी कार खरीदे ही बैंकों के करोडों रुपए डकारने वाले गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए तीन सदस्यों को गिरफ्तार किया था, जबकि 12 अन्य लोग फरार दर्शाएं थे।

गिरोह में शामिल लोगों में कई प्रापर्टी डीलर हैं तो अन्य व्यापार जगत से जुड़े है। राजनीतिक दलों में भी उनका अच्छा खासा दखल था। इन लोगों ने 16 बैंकों से करोड़ों रुपए का ऋण हजम कर लिया है।

नैनीताल बैंक में क्यों सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा हुआ है। सांठगांठ है या लापरवाही अभी कुछ कहना मुमकिन नहीं है। विवेचना के दौरान ही यह साफ हो पाएगा। व्यापक स्तर पर हुई जालसाजी को लेकर बैंक की कार्यशैली पर सवाल तो है।   
- सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
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ऐसे स्वीकृत हुए ऋण

ऋण
12 सितंबर 14 - 9 लाख 89 हजार
20 सितंबर - 9 लाख रुपए
14 अक्तूबर - 9 लाख रुपए
24 अक्तूबर - 11 लाख 16 हजार
पांच नवंबर - 5.50 लाख रुपए
11 नवंबर - 13 लाख रुपए
21 नवंबर - 09 लाख रुपए
22 नवंबर - 09 लाख रुपए
10 दिसंबर - 09 लाख रुपए
16 दिसंबर - 09 लाख रुपए
27 दिसंबर - 8 लाख 50 हजार
27 दिसंबर - 09 लाख रुपए
31 दिसंबर - 6 लाख 88 हजार रुपए
21 जनवरी 15 - 9 लाख रुपए
23 जनवरी - 9 लाख रुपए
28 जनवरी - 9 लाख रुपए
नौ फरवरी - 9 लाख रुपए
14 फरवरी - 9 लाख रुपए
(नैनीताल बैंक के प्रबंधक पुष्कर दत्त द्वारा दी गई पुलिस तहरीर के आधार पर)

दो और बैंकों में लोन का फर्जीवाड़ा
देहरादून के दो अन्य बैंकों में भी इसी तरह का फर्जीवाड़ा किए जाने का मामला सामने आया है। इससे एक बात तो साफ हो गई है कि लोन के नाम पर करोड़ों डकारने वाले प्रापर्टी और व्यापारियों की जड़े बेहद गहरी हैं।

इसकी जानकारी होते ही एसटीएफ ने बैकों के जीएम को पत्र लिखकर इस तरह के मामलों का रिकार्ड मांगा है, क्योंकि दून के अलावा दूसरे जिलों में भी यह खेल हो सकता है। वहीं दून पुलिस ने बैंकों की तहरीर पर मुकदमा दर्ज नहीं किया। शहर के राजपुर, बसंत बिहार, नेहरू कालोनी थाने में यह अभियोग दर्ज होने हैं।

गुरुवार को एसबीआई की दो अन्य शाखाओं में आरोपियों द्वारा कार लोन लेने की बात पता चली। एसटीएफ ने उनके बारे में कागजात अपने कब्जे में ले लिए है। इन बैंको के जीएम को एसटीएफ ने पत्र भेजकर बैंकों की अन्य शाखाओं से जानकारी लेने के लिए कहा है, ताकि पूरे गैंग पर कार्रवाई की जा सके।

एसटीएफ के एसएसपी सदानंद दाते का कहना है कि यह पूरी जानकारी पकड़े गए तीन लोगों से पूछताछ में सामने आई है। अन्य लोगों के हाथ आने पर काफी कुछ मिल सकता है। कार्रवाई में साफ हुआ था कि दून पुलिस ने इन मामलों में रिपोर्ट दर्ज करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।

एसटीएफ का बिस्तार : डीजीपी
पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने लोन के फर्जीवाड़े को लेकर एसटीएफ की कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने कहा कि इस मामले में तह तक जाकर कार्रवाई होगी। केस से जुड़े मुकदमे दर्ज करने के साथ अन्य की गिरफ्तार की जाए। जल्द ही एसटीएफ का विस्तार कर उसे और प्रभावी बनाया जाएगा। दारोगाओं की संख्या भी शीघ्र ही बढ़ा दी जाएगी।
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