चार वर्षीय मोली से जब समाज कल्याण मंत्री यशपाल आर्य को देखा तो उसका दर्द उमड़ पड़ा। मंत्री ने जैसे ही उससे उस दिन के हादसे के बारे में पूछा तो वह बोली कि बले अजय ने जलाया।
लेकिन ये बड़ा अजय कौन है, इस पर शिशु निकेतन स्टाफ एक-दूसरे का मुंह ताकने लगा। इसके बाद मंत्री ने जब बच्चों से वर्णमाला लिखने को कहा तो बच्चे नहीं लिख पाए। इतना ही नहीं शिशु निकेतन में रहने वाले कुछ बच्चे स्कूल भी नहीं जाते हैं तो बालिका निकेतन में पर्याप्त पाठ्य सामग्री तक नहीं है। बच्चों के खेलने का पार्क भी बदहाल है। ये सब देख मंत्री भड़क गए और वहां के स्टाफ को सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त करने को कहा।
केदारपुरम स्थित शिशु निकेतन में तीन साल पहले बच्ची मोली गरम पानी से जल गई थी, तब डॉक्टरों का मनाना था कि पानी तेज गरम था इसलिए घाव है और ऑपरेशन कराना होगा। हालांकि तब से मोली के पैर की ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया।
वहीं, हाल ही में अपर सचिव समाज कल्याण मनोज चंद्रन की रिपोर्ट में बताया गया था कि पानी गीजर का था और गरम था। दूसरे बच्चे ने जैसे ही पानी खोला था वह उस पर गिर गया था। किसी ने उसे जलाया नहीं था।