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I- बुधवार को पोकलेन लगाकर कूड़ा प्लांट पर ट्रामल लगाने के लिए जगह बनाने का काम शुरू
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I- तीनों लैंडफिल इस समय भरे हुए हैं, कूड़ा निस्तारण पर करीब 20 करोड़ रुपये होंगे खर्च
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I शीशमबाड़ा कूड़ा प्लांट पर जमा कूड़े के पहाड़ को हटाने के दिशा में बुधवार को पहला कदम बढ़ा दिया गया। जिस कंपनी को टेंडर सौंपा है उसने पोकलेन लगाकर पहले दिन वहां ट्रामल लगाने के लिए जगह बनानी शुरू कर दी। पहले एक ट्रामल लगाई जाएगी और जैसे-जैसे जगह बनती जाएगी उसके बाद एक-एक करके चार ट्रामल लगाई जाएंगी। कूड़ा निस्तारण के दौरान स्मार्ट सिटी पीडब्ल्यूडी की टीम इसकी निगरानी करेगी। जरूरत पड़ी तो आईआईटी रुड़की से इसका टेक्निकल रिपोर्ट भी तैयार कराएगी।
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Iशीशमबाड़ा कूड़ा प्लांट में इस समय 4.2 लाख मीट्रिक टन कूड़े का पहाड़ लिगेसी वेस्ट के रूप में खड़ा है। इसके निस्तारण के लिए नगर निगम ने अभी हाल ही में एक कंपनी को ठेका दिया है। कूड़ा प्लांट के लैंडफिल में इस समय जगह नहीं है।
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Iदावा : 40 हजार टन हर महीने किया जाएगा निस्तारित
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Iकंपनी ने नगर निगम के सामने दावा किया है। अभी एक ट्रामल लगाया जा रहा है। उसके बाद बाद जैसे-जैसे प्लांट में जगह बनती जाएगी वहां पर ट्रामल की संख्या बढ़ाई जाएगी। कुल वहां चार ट्रामल लगाएं जाएंगे। नगर निगम के अनुसार कंपनी का दावा है कि हर महीने 40 हजार टन कूड़ा निस्तारित करने का दावा किया गया है। हालांकि बीच में मौसम खराब, मशीन खराब और अन्य समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है।
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Iनगर निगम ने एनजीटी में 20 महीने में निस्तारण की बात कही
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I20 नवंबर को एनजीटी में शीशमबाड़ा कूड़ा प्लांट को लेकर सुनवाई हुई। एनजीटी ने कड़े शब्दों में नगर निगम से पूछा था कि कूड़ा प्लांट में खड़े इस कूड़े के पहाड़ को कितने दिनों में निस्तारित करा दिया जाएगा। इसके बाद शपथपत्र देकर नगर निगम ने अपनी योजना स्पष्ट किया था। इसके तहत नगर निगम ने 20 महीने के भीतर कूड़ा प्लांट में जमा लिगेसी वेस्ट को निस्तारित करने का दावा किया है।
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Iनिस्तारण का 459 रुपये प्रति टन, आरडीएफ भी कंपनी का
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Iकूड़ा प्लांट में आईआईटी की रिपोर्ट के अनुसार करीब 4.2 लाख मीट्रिक टन कूड़ा जमा है। इस कूड़े के निस्तारण के 459 रुपये प्रति टन के हिसाब से कंपनी को भुगतान किया जाएगा। इस हिसाब से करीब 20 करोड़ रुपये इस कूड़े के पहाड़ को हटाने के लिए खर्च होंगे। यही नहीं वहां से निकलने वाला आरडीएफ भी कंपनी का ही होगा। सूत्रों की मानें तो कंपनी का आरडीएफ मुजफ्फरनगर के पेपर मिलों के लिए जाएगा।I