तीसरी घटना हल्दूचौड़ निवासी भुवन सिंह के साथ घटी। वह अपनी पत्नी खष्टी नेगी को लेकर बुधवार रात 12 बजे एसटीएच पहुंचे थे। डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद नार्मल डिलीवरी की बात कही थी। सुबह साढ़े चार बजे प्रसव होने के बाद बच्चा दो घंटे तक जीवित रहा और फिर उसकी मृत्यु हो गई। भुवन का आरोप है कि बच्चे के गले में जन्म के दौरान गंदा पानी चला गया था जिससे उसकी मौत हो गई। बताया कि बच्चे का वजन ढाई किलो था, जबकि डॉक्टर बच्चे को कमजोर बता रहे हैं। ओखलकांडा निवासी गुड्डी भी स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग पहुंची और किसी ने उसे हाथ तक नहीं लगाया। उसका बच्चा भी मृत पैदा हुआ।
बच्चे कमजोर और अस्वस्थ थे। दो बच्चों की मौत तो मां के पेट में ही हो गई थी। किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती गई है फिर भी मामले की जांच कराई जाएगी।
-डॉ. सीपी भैसोड़ा, प्राचार्य, राजकीय मेडिकल कॉलेज
चार नवजात की मौत का मामला संज्ञान में आया है। किसी भी स्तर पर लापरवाही का मामला नहीं है। इस मामले में प्राचार्य से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है।
-डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा-शिक्षा
मैं अस्पताल गया था। पूछताछ में अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि नवजात की मौत का कारण प्रसव के दौरान उनका संपूर्ण विकास न होना था। इस मामले में अभी तक किसी भी अभिभावक की ओर से शिकायत नहीं मिली है। अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही जैसी कोई शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
-पंकज उपाध्याय, सिटी मजिस्ट्रेट हल्द्वानी