डीएवी कालेज में अनुसूचित जाति की 2009 से 2014 के बीच बंटी छात्रवृत्ति के चर्चित घोटाले में सोमवार को मुकदमा दर्ज हो गया। कालेज के प्राचार्य की ओर से तत्कालीन प्राचार्य समेत चार लोगों के खिलाफ दो करोड़ 36 लाख रुपये के गबन की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। डालनवाला कोतवाली पुलिस ने घोटाले की जांच शुरू कर दी है।
कोतवाली निरीक्षक यशपाल सिंह बिष्ट के मुताबिक कालेज के प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन ने तत्कालीन प्राचार्य डॉ. दिनेश कुमार, डॉ. रंजना रावत, छात्रवृत्ति प्रभारी पीयूष भटनागर और आरके सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज कराया है। प्राचार्य डा. भसीन के मुताबिक कालेज में अनुसूचित एवं पिछड़ी जाति के छात्रों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है।
कालेज प्रबंधन समिति की ओर से समाज कल्याण के माध्यम से दी गई छात्रवृत्ति के लेखाजोखा में गड़बड़ी सामने आई है। प्रबंध समिति ने अपने स्तर पर जांच की। जांच में 20 सितंबर 2010 को समाज कल्याण से अनुसूचित जाति के छात्रों का छात्रवृत्ति का चेक (17 लाख 23 हजार 169 रुपये) और 10 दिसंबर 2010 को पिछड़ी जाति के छात्रों की छात्रवृत्ति का चेक (पांच लाख) बैंक खातों में जमा न होने का मामला पकड़ में आया है।
समाज कल्याण के अधिकारी भी दायरे में
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उक्त दोनों चेक तत्कालीन प्राचार्य दिनेश कुमार, समन्वयक छात्रवृत्ति (इतिहास विभाग की रीडर डा. रंजना रावत) के अलग-अलग बैंकों के खातों में जमा हुए थे। प्राचार्य डा. भसीन के मुताबिक दोनों खातों का स्टेटमेंट निकाला गया तो 23 सितंबर 2009 से 30 जनवरी 2014 तक इनमें दो करोड़ 36 लाख रुपये जमा हुए थे।
इसके बाद खाते बंद हो गए। कई चेक पीयूष भटनागर और आरके सिंह के नाम भी जारी हुए थे। पुलिस ने पूर्व प्राचार्य समेत चार लोगों के खिलाफ धारा 420, 409, 467, 468 और 471 के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक चार नामजदों के अलावा मुकदमे में अज्ञात लोग भी शामिल हैं। विवेचना में नामों का खुलासा होगा।
पुलिस की जांच में समाज कल्याण विभाग के अफसर व कर्मचारी भी शक के दायरे में हैं। सूत्रों के मुताबिक समाज कल्याण के एक अधिकारी के खाते में भी डीएवी कालेज की छात्रवृत्ति का चेक लगाया गया है। कई और लोगों के खाते में पैसा गया है, जिसकी जांच पुलिस कर रही है।