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ध्यानचंद को भारत रत्न न मिलने पर गुस्साए भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कोच, कही बड़ी बात

Fri, 09 Jun 2017 11:05 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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hardayal singh
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हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिलने पर भारतीय टीम के पूर्व कोच सूबेदार (अप्रा) हरदयाल सिंह ने सख्त नाराजगी जताई है।
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उनका कहना है कि आज तक मेजर ध्यानचंद को उचित सम्मान नहीं मिल पाया है। बृहस्पतिवार को आर्मी चीफ की ओर से सम्मान मिलने के दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने अपनी नाराजगी बयां की।

मेजर ध्यानचंद को भारत रत्न नहीं मिलने संबंधी सवाल पर वह बेहद उत्तेजित हो गए। कहा कि मेजर ध्यानचंद के साथ तो अन्याय हुआ। साथ ही राजनीति ने भारतीय हॉकी को बर्बाद कर डाला। ध्यानचंद को भारत रत्न मिलना ही चाहिए। साथ ही साथ कैप्टन रूप सिंह को भी उनका हक मिलना चाहिए। हॉकी के खिलाड़ी भूख व गरीबी से मर रहे हैं।
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बुजुर्ग हरदयाल कहते हैं कि हाकी बेहद तकनीकी का खेल है। लिहाजा इसे कमतर मानना शर्मनाक है। हॉकी टीम के पूर्व कोच का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह हॉकी को रोजगार से जोड़े। बिना आर्थिकी के हॉकी आगे नहीं बढ़ सकती। क्रिकेट की तरह यहां भी सरकार और बड़ी कंपनियों के निवेश की जरूरत है। खिलाड़ियों को अच्छा पैकेज व प्रशिक्षण के दौरान बढ़िया भोजन मिले। 
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कभी दून में हॉट फेवरेट थी हॉकी

hardayal singh
हॉकी टीम के पूर्व कोच एवं ओलंपिक पदक विजेता हरदयाल सिंह का कहना है कि उनका बचपन दून में बीता है। पलटन बाजार स्थित एपी मिशन स्कूल व साधुराम इंटरमीडिएट स्कूल में पढ़ाई की। भारत विभाजन से पहले देहरादून में हॉकी सबसे लोकप्रिय खेलों में से एक था। यहां दो हॉकी क्लब हुआ करते थे।

ग्रीन इंडिपेंडेंट व फ्रेंड इंडिपेंडेंट। वह फ्रेंड इंडिपेंडेंट टीम में थे। तब दून में मुस्लिमों की खासी आबादी थी। अच्छी हाइट के पठान व गंधारी टीम में होते थे। यूपी के जाट, गुर्जर, राजपूत, त्यागी बिरादरी के मुस्लिम अच्छे खिलाड़ी हुआ करते थे। अधिकतर मुस्लिम उनकी टीम में थे। लेकिन विभाजन के दौरान ज्यादातर पाकिस्तान चले गए। देहरादून में ही उन्हें हॉकी गहराई से सीखने को मिली।  

जमकर करते हैं व्यायाम
89 वर्ष की उम्र में भी हरदयाल सिंह व्यायाम करते हैं। साथ ही साइक्लिंग का भी शौक है। सुबह और शाम जपुजी का पाठ करते हैं। हर दिन अरदास करते हैं। सिख परंपरा और संस्कृति पर पूरी श्रद्धा है। बहू उनका पूरा ध्यान रखती हैं। अब बहुत हल्का भोजन करते हैं। लेकिन हाकी का मैच देखते हैं तो सारा अनुशासन भूल जाते हैं।
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