आज राज्यपाल लाट साहब बनकर भारी सिक्योरिटी को अपने लिए स्टेटस सिंबल मानते हैं, जो गलत है। यह कहना है उत्तराखंड के पूर्व राज्यपाल सुदर्शन अग्रवाल का।
फ्लीट में शामिल वाहनों की संख्या कम करवाई
उन्होंने कहा कि वे जनवरी 2003 में राज्यपाल बनकर उत्तराखंड आए तो सबसे पहले लाट साहब कहलाने वाले इस पद को आम बनाया। पहले फ्लीट में शामिल वाहनों की संख्या कम करवाई। अधिकारियों को निर्देश दिया कि फ्लीट के लिए दो मिनट से ज्यादा कहीं भी ट्रैफिक न रोका जाए।
सुरक्षा में 120 कर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या एक तिहाई कर दी गई। सहस्त्रधारा रोड स्थित हिम ज्योति स्कूल पहुंचे सुदर्शन अग्रवाल ने राज्यपाल पद पर अपना नजरिया अमर उजाला से साझा किया। पेश हैं उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
सवाल : अपने कार्यकाल में आपने उत्तराखंड की क्या खामियां देखीं, आज प्रदेश ने उन्हें कितना दूर किया?
जवाब : उस वक्त प्रदेश को बने कुछ ही समय बीता था। हर बात नई थी, हर काम को गंभीरता से लिया जाता था। अब मैं काफी कम यहां आता हूं लेकिन काफी विकास देखने को मिला है।
सवाल : हाल ही में निवर्तमान राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी ने तबादला आदेश आने के बावजूद जाते-जाते कई फाइलों पर हस्ताक्षर कर दिए। आप क्या कहेंगे?
जवाब : देखिए रुका हुआ काम, अगर अंतिम वक्त में भी उन्होंने निपटाया है तो मेरे ख्याल से यह सही किया। मैं इस बात का समर्थन करता हूं। रही बात तबादला आदेश आने की तो इस बारे में कुछ कहना नहीं चाहूंगा।
सवाल : अपने कार्यकाल और वर्तमान में राज्यपाल और नेताओं पर आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : आज के राज्यपाल लाट साहब की तरह रहते हैं। नेताओं के नखरे भी कम नहीं हैं। मैंने अपनी फ्लीट कम कराने के साथ ही सिक्योरिटी भी बेहद कम करा दी थी। मेरे ख्याल से हर राज्यपाल को यह बात समझनी चाहिए।
सवाल : निवर्तमान राज्यपाल डा. अजीज कुरैशी सरकार और नेताओं के खिलाफ भी जमकर नाराजगी जाहिर करते थे। जैसे जंगलों के सफाए के लिए उन्होंने सरकारों और नेताओं को जिम्मेदार ठहराया। आप क्या कहेंगे?
जवाब : मैं उनका समर्थन करता हूं। निश्चित तौर पर शासन में बैठे अफसर और नेता ही गलत कामों को बढ़ावा देते हैं। हमें इस अंधाधुंध विकास को रोकना होगा।