केंद्रीय भूमि संरक्षण जलागम पर्यावरण, भारत सरकार की फर्जी सब-डिवीजन खोलकर नियुक्ति पत्र भी बांट दिए गए और उत्तराखंड शासन-प्रशासन को हवा तक नहीं लगी।
सात महीने तक वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों ने जब शिकायत की तो प्रशासन को पता चला और फर्जीवाड़ा खुला। फर्जी सब-डिवीजन से विश्व बैंक की परियोजनाओं के फर्जी वर्क आर्डर जारी किए जा रहे थे। फर्जी सब-डिवीजन अफसर को जेल भेजने के बाद मामले की गहन छानबीन की जा रही है।
रानीपोखरी में बलवीर सिंह नेगी के आवास पर केंद्रीय भूमि संरक्षण जलागम का फर्जी सब- डिवीजन कार्यालय साल भर पहले खोला गया था। नेगी से अरुण कुमार मिश्र ने खुद को सब-डिवीजन अफसर बताया। आठ महीने पहले सब- डिवीजन के लिए अरुण ने स्टाफ की नियुक्तियां भी कर लीं।
नरेंद्रनगर टिहरी के नीरज सिंह को अवर अभियंता का नियुक्ति पत्र श्रीनगर पौड़ी सब-डिवीजन की तरफ से जारी किया गया। इसके अलावा और भी स्टाफ की नियुक्ति की गई थी। जब सात महीने तक स्टाफ को वेतन नहीं मिला तो नीरज सिंह ने 31 दिसंबर 2014 लोक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई।
जांच 5 जनवरी 2015 से शुरू हुई। प्रशासन ने एक तरफ तो नायब तहसीलदार ऋषिकेश को जांच सौंपी और दूसरी तरफ मुख्य परियोजना निदेशक एस. रामास्वामी, अपर निदेशक जलागम कौलागढ़ से सब-डिवीजन की तसदीक की। पता चला कि परियोजना का रानीपोखरी में कोई सब-डिवीजन ही नहीं है।
एक महीने पहले ठग जेल गया
जब सब-डिवीजन का फर्जीवाड़ा खुलने लगा तो डिफेंस कालोनी प्रेमनगर के जितेंद्र चौधरी ने थाने में अरुण कुमार मिश्र के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई। अरुण ने जितेंद्र को विश्व बैंक की परियोजना के फर्जी वर्क आर्डर निर्गत किए थे। एडीएम वित्त ने बताया कि इस पर पुलिस ने एक महीने पहले आरोपी को जेल भेज दिया।
सात महीने में कोई काम नहीं
एडीएम वित्त ने बताया कि फर्जी डिवीजन में काम करने वाले कर्मचारियों से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सात महीने से उनसे कोई काम नहीं कराया गया। यही कहा जाता था कि आफिस समय पर आएं। परियोजनाएं शुरू होते ही काम शुरू हो जाएगा।
करोड़ों के वारे-न्यारे का था इरादा
रानीपोखरी में फर्जी सब-डिवीजन करोड़ों के वारे-न्यारे करने के इरादे से खोला गया था। अधिकारियों का कहना है कि विश्व बैंक की योजनाएं बताकर फर्जी वर्क आर्डर जारी किए जा रहे थे।
करोड़ों की योजनाओं बताकर ठेकेदारों से पेशगी कमीशन लिए जाने का इरादा था। लोग अरुण कुमार मिश्र के झांसे में आकर करोड़ों के वर्क आर्डर के लालच में पहले कमीशन दे देते। प्रेमनगर, इठरना समेत कई स्थानों का उसने वर्क आडर्र दिया ही था कि फर्जीवाड़ा उजागर हो गया।
भागने की फिराक में था अरुण
चार महीने पहले जब अरुण को प्रशासन की जांच का पता चला तो उसने कागजात समेटने शुरू कर दिए। स्टाफ ने पूछा तो उसने बताया कि कार्यालय चौबटिया रुद्रप्रयाग शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन इसी बीच फर्जी वर्क आर्डर निर्गत करने के मामले में एफआईआर दर्ज होने पर धरा गया।
चुन-चुनकर रखा था बेरोजगारों को
अरुण कुमार मिश्र ने उन्हीं लोगों को नौकरी पर रखा था जो बेरोजगार थे। उसने सोचा था कि बेरोजगारी से त्रस्त लोग नौकरी के मामले में ज्यादा छानबीन नहीं करेंगे। अब लोग वेतन के लिए परेशान घूम रहे हैं। तहसीलदार ऋषिकेश ने अपनी जांच रिपोर्ट में बताया कि ग्राम इठारना और छिद्दरवाला में उसने दो सड़कों के वर्क आर्डर जारी किए थे।
मामला लोक शिकायत निवारण प्रकोष्ठ में आया था। लेकिन शुरुआती जांच में इसकी गंभीरता नजर आई तो फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। आरोपी को जेल भेजा जा चुका है। दूसरे बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए भी मामले की छानबीन की जा रही है।
- प्रताप सिंह शाह, एडीएम वित्त