छोटे कारोबारियों को अब फूड लाइसेंस बनवाने के लिए कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर नहीं काटने होंगे।
एफएसएसएआई की नई एडवाइजरी के अनुसार अब इन व्यापारियों के लाइसेंस जनाधार केंद्रों पर बनेंगे। खास बात यह है कि आवेदन करते ही हाथों-हाथ उन्हें रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट भी मिल जाएगा। 30 सितंबर तक लाइसेंस बनवाने वालों को प्रोसेसिंग फीस भी नहीं देनी होगी।
खाद्य पदार्थ तैयार करने और बेचने वालों को फूड सेफ्टी का लाइसेंस बनवाना अनिवार्य होता है। इसमें सामान्य ठेली लगाने वालों से लेकर बड़े होटल और उद्योग तक शामिल होते हैं। खाद्य सुरक्षा अभिकरण के लाइसेंस के बिना खाद्य पदार्थों की बिक्री नहीं की जा सकती है।
अभी तक यह लाइसेंस जिला अभिहीत अधिकारी के स्तर से जारी किए जाते थे। इसके लिए व्यापारियों को कार्यालय के चक्कर काटने पड़ते थे। साथ ही फूड इंस्पेक्टर की खुशामद भी करनी पड़ती थी। लेकिन अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड ऑथिरिटी ऑफ इंडिया ने सालाना 12 लाख से कम टर्नओवर वालों को राहत दी है।
ऑथिरिटी की नई एडवाइजरी के अनुसार सालाना 12 लाख से कम टर्नओवर वाले व्यापारी देवभूमि जनसेवा केंद्र (कॉमन सर्विस सेंटर) पर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के कुछ मिनट बाद ही उन्हें सर्टिफिकेट मिल जाएगा। इसकी एक प्रति ऑनलाइन खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के पास पहुंच जाएगी।
ऐसे में उस पर किसी भी तरह की आपत्ति होने पर अभिकरण अगले 30 दिनों में जांच कर कार्रवाई कर सकेगा। 30 सितंबर तक पंजीकरण करने वाले व्यापारियों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
तीन हजार जनाधार केंद्र
खाद्य सुरक्षा अभिकरण के अनुसार प्रदेश में तीन हजार जनाधार केंद्रों का संचालन हो रहा है। यहां लोगों के तमाम तरह के प्रमाण पत्र तैयार किए जाते हैं। इन केंद्रों का संचालन राज्य सरकार की ओर से किया जाता है।
बड़े व्यापारी भी होंगे शामिल
भविष्य में बड़े व्यापारियों और उद्योगों को भी ऑनलाइन योजना में जोड़ा जाएगा। शुरूआत में केवल छोटे व्यापारियों को ही इसका लाभ मिलेगा। अभी आवेदन के बाद फूड इंस्पेक्टर जांच रिपोर्ट देते हैं, जिसके आधार पर लाइसेंस जारी होता है।
अब व्यापारियों को लाइसेंस के लिए चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। हाथों-हाथ उनका पंजीकरण हो सकेगा और लाइसेंस तैयार हो जाएगा। इससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।
- आरएस रावत, अभिहीत अधिकारी, मुख्यालय