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सावधान! अपने रिस्क पर लें खाने-पीने का सामान

Wed, 18 Feb 2015 07:24 PM IST
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
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रुद्रपुर स्थित राज्य की एक मात्र खाद्य लैब प्रभारी विश्लेषक के भरोसे थी। नौ महीने से यहां स्थायी खाद्य विश्लेषक का पद खाली पड़ा है। कई जिलों में बीते साल नवंबर से नई सैंपलिंग बंद है।
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ऐसे में प्रभारी विश्लेषक पर एक और प्रभार डालकर सूबे की सेहत को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। होली निकट है, ऐसे में मिलावटखोरों की मौज तय है।

अगर आप खाने-पीने का सामान खरीद रहे हैं तो अपने रिस्क पर लें। खाद्य पदार्थों में मिलावट की जांच करने वाली रुद्रपुर स्थित राज्य औषधि एवं खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में खाद्य विश्लेषक पिछले साल जून माह से नहीं है। ऐसे में पुराने सैंपलों की जांच रिपोर्ट नहीं आ रही है। कई जिलों में नई सैंपलिंग बीते नवंबर माह से बंद है।

अब कोढ़ में खाज यह कि रुद्रपुर की प्रयोगशाला का प्रभार संभाल रहे औषधिक विश्लेषक जेआर ध्यानी को हरिद्वार में राज्य आयुर्वेदिक औषधि परीक्षण प्रयोगशाला का भी अतिरिक्त चार्ज दिया गया है। कुल मिलाकर स्थिति कुछ ऐसी है मानो प्रदेश में मिलावटखोरों को चांदी काटने की खुली छूट है।
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उत्तराखंड के लिए स्थिति चिंताजनक

उत्तराखंड के लिए स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि यह देश का अकेला राज्य है, जहां पद होने के बावजूद महीनों से खाली है। हिमाचल तक में स्थिति बेहतर है। वहां भी सोलन में ही एक प्रयोगशाला है। लेकिन वहां खाद्य विश्लेषक के निर्देशन में सैंपल जांच का काम हो रहा है।

अन्य राज्यों ने की व्यवस्था
खाद्य नमूनों की जांच के लिए दमनदीव गुजरात की प्रयोगशाला की मदद ले रहा है। चंडीगढ़ पंजाब और हरियाणा की प्रयोगशालाओं की सेवा ले रहा है। सिक्किम और मिजोरम में प्रयोगशाला नहीं है। यूपी में लखनऊ, बनारस और आगरा में प्रयोगशालाएं हैं।

65 हजार के लिए एक प्रयोगशाला
उत्तराखंड के तकरीबन 65 हजार खाद्य व्यवसायियों के लिए केवल एक लैब है। प्रदेश भर से भेजे गए डेढ़ हजार से अधिक सैंपल रुद्रपुर स्थित प्रयोगशाला से जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। बोझ अधिक होने की वजह से नए सैंपल लिए जाने पहले ही बंद किए जा चुके।
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दूध के 60 नमूनों में से 40 में मिलावट

खाद्य पदार्थों में मिलावट की स्थिति बदतर है। दूध का उदाहरण लें तो हिमालयन इंस्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट (एचआईएचटी), जौलीग्रांट के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग (सीएमडी) का 24 माह पहले का सर्वे आंख खोलने वाला है।

इसमें टेस्टिंग किट से कच्चे दूध (खुला और ब्रांडेड दोनों) की क्वालिटी मापी गई थी। अस्पताल के आसपास के क्षेत्र के साथ ही डोईवाला, रानीपोखरी जैसी जगहों से दूध के 60 नमूने एकत्र किए गए थे। इसमें से 40 में मिलावट पाई गई थी। सर्वे में कुछ सेहत के लिए खतरे वाले तत्व भी मिले होने का दावा किया गया था।

तीन-तीन दिन की ड्यूटी
हरिद्वार की प्रयोगशाला का प्रभार हाल ही में मिला है, लिहाजा वहां भी काम शुरू करना है। फिलहाल तीन-तीन दिन दोनों जगह बैठना है।
-जेआर ध्यानी, प्रभारी राज्य औषधि एवं खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, रुद्रपुर
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