आने वाले दिनों में किसी भी शहर का विकास बिना फ्लाईओवर के संभव नहीं हो सकता।
सड़कों पर हर रोज सैकड़ों की संख्या में नए वाहन उतर रहे हैं। हजारों की संख्या में बाहरी वाहन शहरों में प्रतिदिन घुस जाते हैं। सड़कें चौड़ी हो नहीं सकती। ऐसे में सड़कों के ऊपर सड़क बनाने के सिवा और कोई विकल्प नहीं बचता।
आने वाली पीढ़ी को यदि जाम से बचाना है और शहर को विकास की तरफ ले जाना है तो शहर में ऐसी जगहों पर अभी से फ्लाईओवर बनाने होंगे जहां पर जाम लगता है, और जो आने वाले दिनों में आफत बनने वाले हैं। फ्लाईओवर के मामले में देहरादून काफी पिछड़ा है।
इसकी वजह यह है कि यहां नगर निगम और विकास प्राधिकरण से लेकर प्रशासन और शासन तक में ट्रैफिक समस्या के निदान के लिए न तो कोई सोच है और न ही रुचि। हालांकि, दून में तीन जगहों पर फ्लाईओवर बन रहे हैं और तीन जगहों पर प्रस्तावित हैं।
जो बन रहे हैं उनकी गति धीमी है और जो प्रस्तावित हैं वे कब शुरू होंगे अंदाजा लगाना मुश्किल है। यदि सभी बन जाएंगे तो काफी राहत मिलेगी, लेकिन इनसे ही काम चलने वाला नहीं है। फ्लाईओवर श्रृंखला की तीसरी कड़ी में आज सहारनपुर चौक से घंटाघर तक का जायजा लेते हैं।
सहारनपुर चौक से घंटाघर तक बने फ्लाईओवर
सहारनपुर चौक से घंटाघर तक वाहन चलते नहीं, बल्कि रेंगते हैं। सुबह और शाम यहां से गुजरना काफी कष्टदायक होता है। जाम की एक वजह सड़क का कम चौड़ा होना है।यदि यहां पर फ्लाईओवर बना दिया जाए तो बाहर से आने वाले वाहन फ्लाईओवर से सीधा राजपुर रोड निकल जाएंगे और स्थानीय वाहनों को नीचे से आने-जाने में सुविधा हो जाएगी। यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि सहारनपुर रोड से मसूरी के लिए जाने वाले वाहन इसी रास्ते से गुजरते हैं।
आढ़त बाजार में तो सड़क पर भारी वाहनों को खड़ा करके व्यापारी माल लोड और अनलोड कराते हैं। इस वजह से दूसरे वाहनों को चलने की जगह कम मिलती। रेलवे स्टेशन के सामने हमेशा जाम लगा रहता है। यहां से कुछ ट्रैफिक पलटन बाजार की तरफ जाता है तो कुछ उधर से आता है। कुछ ट्रैफिक स्टेशन की तरफ मुड़ता है। वाहनों की अधिकता की वजह से जाम की स्थिति बनती है। प्रिंस चौक पर हमेशा जाम लगा रहता है। लोगों को लालबत्ती पर करीब एक मिनट से अधिक समय तक खड़ा रहना पड़ता है।
द्रोण होटल के पास से कई वाहन दून अस्पताल और डीएम दफ्तर जाने के लिए मुड़ते हैं। इस वजह से यहां जाम लगता है। तहसील चौक पर लोगों को कई मिनट तक हरी बत्ती होने का इंतजार करना पड़ता है। यही हाल दर्शनलाल चौक का है। घंटाघर पर भी वाहन रेंगकर ही चलते हैं।
क्यों जरूरी होते हैं हवाई रास्ते
किसी भी शहर के विकास, ट्रैफिक जाम से मुक्ति और शहर की सुंदरता के लिए फ्लाईओवर (हवाई रास्ते) बहुत जरूरी होते हैं। इसकी अहमियत को दो उदाहरणों से समझा जा सकता है। दूसरे शहरों के विकास प्राधिकरण और सरकारें हवाई रास्ते के बारे में कितनी गंभीर हैं इसका भी अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन्होंने बनाई योजना
पिछले दिनों मुंबई महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण की बैठक में मुख्यमंत्री देवेंद्र फर्डानवीस की मौजूदगी में वित्तीय वर्ष 2015-16 के लिए 3832.30 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी मिली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा उद्देश्य शहर और प्रदेश में यातायात एवं आवास को सहज और सुलभ बनाना है।
यही वजह रही कि दो फ्लाईओवर के लिए भी बजट स्वीकृत किया गया। मेट्रो और मोनो रेल के लिए भी। जाहिर है महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की चिंता में शहर की यातायात व्यवस्था है, इसलिए उन्होंने इसके निदान के लिए योजना बनाई। जब यह योजनाएं साकार होंगी तो शहरवासियों को इसका लाभ मिलेगा। ऐसी योजनाओं का लाभ कैसे मिलता है इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं।
और यहां बदल गई तस्वीर
नियोजित तरीके से बसाए गए शहर चंडीगढ़ से सटा है जीरकपुर। कभी यहां करीब 15 घर हुआ करते थे और इसकी पहचान गांव के रूप में होती थी। लेकिन आज यह चंडीगढ़ का न केवल उपनगर बन गया है, बल्कि इसका क्षेत्रफल चंडीगढ़ से भी आगे निकल गया है। जीरकपुर के विकास की कहानी शुरू होती है यहां बने फ्लाईओवर से।
साल 2005 में जब यहां पर फ्लाईओवर बनना शुरू हुआ था तो गांव के लोग चिंता में पड़ गए थे। लेकिन करीब 2.7 किलोमीटर लंबा यह फ्लाईओवर जब साल 2007 में चालू हो गया तो लोगों के लिए वरदान साबित हुआ। यहां पर लगने वाले जाम को इस फ्लाईओवर ने काफी हद तक खत्म कर दिया।
फ्लाईओवर जब बनना शुरू हुआ था तभी कॉलोनाइजरों ने जीरकपुर और आसपास के कई गांवों का रूख किया। यहां कालोनियां विकसित करने के साथ ही मॉल और होटलों की पूरी श्रृंखला बना दी। इस तरह जीरकापुर गांव से शहर हो गया।
देश के दस बड़े फ्लाईओवर
थाने फ्लाईओवर मुंबई : कभी न सोने वाले शहर के रूप में विख्यात मुंबई वालों को इस फ्लाईओवर से जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिली है। मुंबई में 44 फ्लाईओवर बन चुके हैं और 16 प्रस्तावित हैं। देश का पहला समुद्र पर बना पुल भी यहीं है।
हेब्बाल फ्लाईओवर बंगलूरू : देश की उद्यान सिटी के रूप में विख्यात बंगलूरू में यह फ्लाईओवर आउटर रिंग रोड और बेल्लारी रोड पर बना है। डबल रोड पर बनाए गए इस फ्लाईओवर से लोगों को ट्रैफिक जाम से नहीं जूझना पड़ता है।
विश्वैश्वरैया फ्लाईओवर हैदराबाद : यह फ्लाईओवर देश के सबसे बड़े फ्लाईओवरों में शामिल है। यह 11.6 किलोमीटर लंबा है। देश के सबसे बड़े एक्सप्रेस-वे पर बनाया गया है। इसकी वजह से ट्रैफिक को रफ्तार मिलती है।
वरधा फ्लाईओवर सूरत : इस फ्लाईओवर के बनने से सूरत शहर में जाम की समस्या से काफी हद तक निजात मिली है। देश के बड़े फ्लाईओवरों में इसकी भी गिनती की जाती है।
एम्स फ्लाईओवर दिल्ली : राजधानी के ट्रैफिक को सुचारू बनाने में इस फ्लाईओवर की अहम भूमिका मानी जाती है। व्यस्त यातायात के बीच फ्लाईओवर का निर्माण कैसे किया जाता है, इस फ्लाईओवर के निर्माण से सीखा जा सकता है।
एजेडी बोस फ्लाईओवर कोलकाता : एजेडी बोस रोड पर बना यह फ्लाईओवर 1.8 किलोमीटर लंबा है। कोलकाता के महत्वपूर्ण और लंबे फ्लाईओवरों में से यह एक है।
लुकास फ्लाईओवर चेन्नई : इसे फ्लाईओवरों का शहर भी कहा जाता है। यहीं पर प्रसिद्ध कथिपरा जंक्शन फ्लाईओवर भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसने चेन्नई का चेहरा ही बदल दिया।
मेमनगर जंक्शन फ्लाईओवर अहमदाबाद : गुजरात के सुंदर शहरों में से एक है अहमदाबाद। साइंस सिटी के रूप में विकसित होने के बाद इस शहर का फोकस बुनियादी ढांचे के विकास पर है।
चिरैयाटाड़ फ्लाईओवर पटना : देश के सबसे पुराने शहरों में से एक पटना में बने इस फ्लाईओवर से काफी ट्रैफिक गुजरता है। इससे शहरवासियों को जाम की समस्या से काफी राहत मिली है।
यूनिवर्सिटी फ्लाईओवर पुणे : शहर के ट्रैफिक को सुचारू रूप से संचालित करने में इस फ्लाईओवर ने अहम भूमिका निभाई है। पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा पुणे शहर अपनी हरियाली और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां के मौसम को बेहद रोमांटिक माना जाता है।