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कहर से ज्यादा जमा पूंजी गवांने का डर

Thu, 21 Aug 2014 12:47 PM IST
राकेश शर्मा/ अमर उजाला, देहरादून
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कुदरत के कहर में सात परिजनों, परिचितों को गवांने वाले काठबंगला बस्ती के लोगों को बारिश डराती तो है, लेकिन हादसों से ज्यादा उन्हें जमा-पूंजी खोने की चिंता है।
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हादसों का शिकार होने का भी कोई डर नहीं
17 अगस्त से धर्मशाला और प्राइमरी स्कूल में उन्हें शरण दी गई है, लेकिन वे अपने घरों को छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि इन दिनों बरसात के चलते भले ही वे रात स्कूल में काट रहे हैं, लेकिन पौ फटते ही बस्ती में बने अपने घरों में लौट जाते हैं।

इन लोगों को पहाड़ी दरकने से घरों पर मलबा गिरने और नदी के उफनाने से हादसों का शिकार होने का भी कोई डर नहीं है। उनका कहना है कि वे किसी भी कीमत पर अपने मकान नहीं छोड़ेंगे, चाहे जो हो जाए।
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हालांकि, कुछ लोग तभी बस्ती से जाने के लिए तैयार हैं जब प्रशासन उन्हें किसी दूसरी सुरक्षित जगह पर घर दिलवाए।

बस्ती छोड़ने को तैयार नहीं ग्रामीण
16 अगस्त की रात जवान बेटे लक्ष्मेंद्र को गवांने वाली शशि काठबंगला बस्ती में अपना घर छोड़कर जाने के लिए तैयार नहीं है। मूलत: मुरादाबाद के इस परिवार का यहां पक्का मकान है। शशि कहती है कि जिंदगी भर की कमाई से यह मकान बनाया था। चाहे जो हो, परिवार यहां से नहीं जाएगा।

बस्ती निवासी खुशबू का कहना है कि गाढ़ी कमाई जमा करने के बाद किसी तरह यहां अपना मकान बनाया है। कहती हैं कि खतरे का अहसास उन्हें भी है, लेकिन वह घर छोड़कर कहां जाएं। प्रशासन पहले कहीं दूसरी जगह मकान दिलवाए, तभी उनका परिवार बस्ती से जाने पर विचार करेगा।

पहले क्यों सोया रहा प्रशासन
राजपुर में साईं मंदिर के पीछे वर्षों पहले बसी यह बस्ती अवैध है। पहाड़ी को काटकर यहां मकान बनाए गए हैं। कई परिवार तो यहां बीस साल से पक्के मकान बनाकर रह रहे हैं।

अब 16 अगस्त के हादसे के बाद प्रशासन और नगर निगम भले ही कुछ जागे हुए नजर आ रहे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर बस्ती में एक के बाद सैकड़ों मकान कैसे बनने दिए गए।

तब प्रशासन को अवैध कब्जे और पहाड़ी से खतरे की आशंका क्यों नहीं दिखी।

नेता खतरा नहीं, वोट देखते हैं
सूत्र बताते हैं कि बस्ती में अधिकतर परिवारों को जनप्रतिनिधियों की शह पर बसाया गया है। पहाड़ी काटकर तो मकान बने ही हैं, नदी के दोनों किनारों पर भी अवैध कब्जे करवाकर सैकड़ों मकान बनवा दिए गए हैं।

राजनैतिक दबाव का ही असर है कि प्रशासन और नगर निगम इन कब्जों पर कार्रवाई से कतराते रहे। खतरों के मुहाने पर लोगों को बसाने वाले नेताओं को सिर्फ इन बस्ती वासियों के वोट ही नजर आते हैं।

डीआईजी ने माना बस्ती पर खतरा
डीआईजी अमित सिन्हा ने बुधवार को बस्ती का दौरा कर यहां हादसों की आशंका देखते हुए चिंता जताई। डीआईजी ने वे मकान भी देखे, जिनके ढहने से सात लोगों की मौत हो गई थी।

उन्होंने कहा कि पूरी बस्ती के मकानों पर खतरा बना हुआ है। पहाड़ काटकर और नदी किनारे लोगों ने अवैध मकान बना लिए हैं। बताया कि ऐसा अब नहीं होने देंगे। प्रशासन संग मिलकर कार्ययोजना बनाई जाएगी।

स्कूल भवन में दरार
काठबंगला बस्ती के विस्थापितों को जिस राजकीय उच्चतर प्राथमिक विद्यालय में रात बिताने के लिए रखा गया है, उसके भवन में ही दरारें बनी हुई हैं।

ऐसे में प्रभावित परिवारों को यहां भी हादसे की आशंका सता रही है। प्रशासनिक स्तर पर जीर्ण भवन में प्रभावितों को ठहराना लापरवाही की ओर इशारा करता है।

प्रभावितों का दर्द
प्रशासन हमें यहां से हटाने की बात तो कर रहा है, लेकिन यह भी तो बताए हमें कहां विस्थापित किया जाएगा। स्कूल में पांच दिन से अनाज का एक दाना तो दिया नहीं गया।
- पल्लवी

आपदा के बाद कागजी कार्रवाई तो हो रही है, लेकिन अब तक किसी पीड़ित परिवार को कोई मदद नहीं दी गई है। यहां से लोगों को हटाने के बजाय सुविधाएं उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएं।
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- वीरेंद्र सिंह
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