गुरुवार देर शाम राजधानी देहरादून में हुई बारिश रिस्पना के आस-पास रहने वालों पर कहर बनकर टूटी। भारी बारिश में आधा दर्जन मकान बह गए।
मौके पर पहुंची पुलिस, प्रशासन की टीम ने हाई अलर्ट जारी कर दिया। रिस्पना किनारे की बस्तियों में लोगों से घरों को खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को कह दिया गया।
सैकड़ों लोगों ने आस-पास के क्षेत्रों में छज्जों के नीचे शरण ले रात बिताई। आपदा प्रबंधन की टीमें अपने काम में पूरी तरह नाकारा साबित हुईं।
मूसलाधार बारिश से स्थानीय नदियों में उफान
देहरादून में हुई भारी बारिश के साथ ही टिहरी और आस-पास के जिलों में हो रही मूसलाधार बारिश से स्थानीय नदियां उफन गईं।
गुरुवार रात तकरीबन नौ-10 बजे के आस-पास नदी का जल स्तर बढ़ता देख लोगों की सांसें अटक गई। देखते-ही-देखते नदी उफान आ गई। लोगों का जमघट लग गया।
हर कोई किसी अनहोनी की आशंका से सहमा था। महज आधे घंटे के भीतर पानी पूरन बस्ती, मोहिनी रोड के पुल के ऊपर से बहने लगा। बस्तियों के घरों में पानी घुस गया।
पुल पर बह रहे पानी में संतुलन न बना सकने पर दो बाइक सवार बह गए।
108, पुलिस, प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंची
नाजुक स्थिति की सूचना मिलते ही राजपुर क्षेत्र विधायक राजकुमार समेत 108, पुलिस, प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं।
हालात देख बस्ती को खाली करने के आदेश दे दिए गए। लोगों ने आस-पास खाली जगहों पर शरण ली। स्थिति देर रात तक गंभीर बनी हुई थी।
उधर, मध्य रात्रि कांवली में बिंदाल नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया। पानी पुल तक चढ़ आया। यहां आपदा प्रबंधन, प्रशासन की टीमें नहीं पहुंची।
नदी के हालात देख यहां भी नदी किनारे रह रहे लोगों में दहशत बैठ गई।
घरों में भर गया बरसात का पानी
विजय कालोनी में भी हाल बेहाल था। बरसात का पानी घरों में भर गया। बरसते पानी में लोग छाता ले छत पर चढ़ने को मजबूर हो गए।
देर रात विवेक विहार जाखन में भी भारी बारिश में ढांग के बीच बना एक मकान गिर गया। इसमें एक व्यक्ति बुरी तरह घायल हो गया। सहस्त्रधारा रोड पर भी बारिश से तबाही हुई।
यहां तेज बारिश में दो गाड़ियां बह गईं। स्थानीय निवासी पार्थ के अनुसार13 गांव रेस्टोरेंट भी पानी में डूब गया। मौसम विभाग में रात्रि 11.30 बजे तक 45 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई थी।
अपने ही गांव में कैद हुए हैंण गांव के 20 परिवार
नंदाकिनी नदी के कटाव से भूस्खलन की जद में आए चमोली के हैंण गांव के 20 परिवार मूसलाधार बारिश से अब अपने ही गांव में कैद हो गए हैं।
भूस्खलन से गांव का एक मात्र पैदल मार्ग ध्वस्त हो गया है, जिससे गांव को अन्य क्षेत्रों से संपर्क कट गया है। ग्रामीण रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए जान-जोखिम में डालकर आवाजाही करने को मजबूर हैं।
स्कूली बच्चे भी क्षतिग्रस्त मार्ग से होकर विद्यालय जाने को मजबूर हैं। ग्राम प्रधान दीक्षा गौण, राम प्रसाद, रमेश चंद्र व मोहन प्रसाद का कहना है कि बीते वर्ष आपदा में ध्वस्त मार्ग को प्रशासन आज तक ठीक नहीं कर पाया।
उन्होंने कहा यदि जिला प्रशासन ने शीघ्र मार्ग दुरुस्त नहीं किया गया तो ग्रामीण आंदोलन करने को बाध्य होंगे।