-जिलेवार नोडल अधिकारी भी तैनात होंगे
- फायर सीजन के पहले से ही 61 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। प्रदेश में फायर सीजन शुरू हो गया है। वन मुख्यालय के अनुसार अब फील्ड कर्मचारियों-अधिकारियों को अपरिहार्य स्थिति में ही अवकाश मिलेगा।
जंगल की आग की दृष्टि से 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन होता है। यह समय वनाग्नि की दृष्टि से संवेदनशील माना जाता है। प्रमुख वन संरक्षक रंजन मिश्रा ने बताया कि फायर सीजन के लिए सभी प्रबंध किए जा रहे हैं। अब वन विभाग के फील्ड स्टाफ और अफसरों को अपरिहार्य स्थिति में ही अवकाश मिलेगा। जल्द ही जिलावार उच्चाधिकारियों को नोडल अधिकारी बनाया जाएगा, जो जिलों में वनाग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्यों की निगरानी करने के साथ सुझाव देंगे। मुख्य वन संरक्षक सुशांत पटनायक ने बताया कि सर्दियों में बारिश-बर्फबारी पर्याप्त नहीं हुई है। ऐसे में आने वाले समय में चुनौती बढ़ सकती है।
41 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को नुकसान
प्रदेश में फायर सीजन शुरू होने से पहले ही जंगल धधक रहे हैं। पिछले साल नवंबर से अब तक राज्य में वनाग्नि की 61 घटनाएं हो चुकी हैं। इसमें गढ़वाल मंडल और वन्यजीव क्षेत्र में क्रमश: 20 और 41 घटनाएं हुई हैं। विभाग के अनुसार कुमाऊं मंडल में कोई भी घटना नहीं हुई। अब तक राज्य में जंगल की आग से 41 हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा को क्षति पहुंच चुकी है। वहीं सर्दियों में पर्याप्त बारिश और बर्फबारी न होने से जंगल शुष्क है। ऐसे में आने वाले समय में बारिश- बर्फबारी न होने से चुनौती और बढ़ सकती है।