पीआईबी (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) उत्तराखंड ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी इसे अपने ट्वीटर एकाउंट पर शेयर किया है। इसमें लिखा है कि 'सोशल मीडिया में दिखाया जा रहा है कि उत्तराखंड के जंगलों में आग बढ़ती जा रही है लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है। दिखायी जा रही तस्वीरें पुरानी हैं और इनमें से कई दूसरे देशों से संबंधित हैं। कृपया ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहें।'
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी ट्वीट किया कि
'चीन और चिली के जंगलों में लगी आग वर्ष 2016 और 2019 की वनाग्नि की पुरानी तस्वीरों के माध्यम से उत्तराखंड के खिलाफ एक भ्रामक और सत्य से परे दुष्प्रचार चल रहा है, कृपया ऐसी अफवाहों पर ध्यान न दें और ऐसी भ्रामक खबरों से सावधान रहें' ।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि है। लोग इसके लिए प्रार्थना कर रहे हैं, लेकिन फर्जी कैंपेन के तहत प्रार्थना करना गलत है। हमें प्रत्येक भारतीय की भलाई के लिए प्रार्थना करनी चाहिए। उत्तरखंड के वन विभाग ने भी आग की खबरों को फर्जी बताया है।
वन मंत्री हरक सिंह ने आरोप लगाया कि फेक न्यूज फैलाकर विभाग की छवि को धूमिल किया जा रहा है। इसके बाद वन प्रमुख जयराज ने बाकायदा आदेश जारी कर मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते को सोशल मीडिया प्रभारी नियुक्त किया, उनसे कहा गया कि तथ्यों से परे सूचनाओं का पुरजोर खंडन करें। वहीं, वन अधिकारियों को भी आदेश दिया कि मीडिया प्रभारी को सटीक और सही जानकारी दी जाए। इसके साथ धकाते भी फेक न्यूज के खिलाफ सोशल मीडिया पर सक्रिय हो गए, उन्होंने सही जानकारी देते हुए एक वीडियो भी अपलोड किया।
सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है। वनाग्नि पूरी तरह से नियंत्रण में है। मौसम का भी साथ मिला है। सबसे आग्रह है कि चिंता न करें और फेक न्यूज को फैलने से रोकेंगे।
- डॉ.पराग मधुकर धकाते, मुख्य वन संरक्षक
सोशल मीडिया पर बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है। सोशल मीडिया के ये फायर फाइटर्स की एक ही कोशिश है कि प्रदेश और विभाग की छवि धूमिल की जाए। उत्तराखंड के नाम पर विदेशों की फोटो डाली जा रही है। स्थिति नियंत्रण में हैं और पिछले सालों के मुकाबले इस बार आग की कम घटनाएं सामने आई हैं।
- डॉ.हरक सिंह रावत, वन मंत्री
यह जरूरी है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक प्रचार का तथ्यपरक और विनम्रता से खंडन किया जाए। इसके लिए मुख्य वन संरक्षक पराग मधुकर धकाते को सोशल मीडिया प्रभारी बनाया गया है।
- जयराज, प्रमुख वन संरक्षक (हॉफ)
वन विभाग के मुताबिक 2019 में 25 मई तक 1590 हेक्टेयर जंगल में आग लगी थी। 2020 में 25 मई तक केवल 71.46 हेक्टेयर वन भूमि ही चपेट में आई है। गढ़वाल और कुमाऊं के संरक्षित क्षेत्रों में 26 मई तक कुल 37 घटनाएं सामने आईं। इसमें गढ़वाल मंडल में 12, कुमाऊं मंडल में 15 और वन्यजीव क्षेत्र की 10 घटनाएं हैं।
अभी तक जंगल की आग का कोई बड़ा मामला सामने नहीं आया है। सिविल क्षेत्र में 25 मामले सामने आए। वनाग्नि से करीब 81 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ है और 2.18 लाख रुपये का नुकसान आंका गया है।
पुलिस महानिदेशक अपराध एवं कानून व्यवस्था अशोक कुमार ने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल उत्तराखंड के जंगलों में आग की खबरों में कोई सच्चाई नहीं है, वायरल फोटो-वीडियो में कुछ पुराने तो कुछ विदेशों के हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ये भी पता चला है कि वनाग्नि के नाम कुछ लोग दान भी मांग रहे हैं, ऐसे लोगों के खिलाफ निश्चित रूप से सख्त कार्रवाई की जाएगी।