सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव पर चर्चा तो हुई। लेकिन वित्त विभाग की आपत्तियों के चलते प्रस्ताव लटक गया। वित्त विभाग की ओर से यह तर्क दिया गया कि वेतन बढ़ाने से राजकोष पर 128 करोड़ रुपये सालाना वित्तीय बोझ पड़ जाएगा। अस्थाई सेवा वाले दूसरे कर्मचारी भी वेतन बढ़ाने की मांग करेंगे।
इन तमाम तर्कों का कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और गणेश जोशी ने विरोध किया और कड़ा एतराज जताया। सूत्रों के मुताबिक, प्रस्ताव का एक बार फिर से परीक्षण कराने और उसके बाद कैबिनेट की अगली बैठक में लाने का निर्णय हुआ। हालांकि दोनों मंत्री इससे सहमत नहीं थे।
मैंने इस बात पर नाराजगी जताई कि मंत्रिमंडलीय उपसमिति में मुख्य सचिव, सचिव वित्त और सचिव न्याय भी थे। उप समिति की बैठकें हुईं। तब बैठकों में ये बातें क्यों नहीं कही गई? जब उपसमिति की सिफारिशें तय कर दीं, उसके बाद सवाल क्यों?
- डॉ. हरक सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार
कैबिनेट की बैठक में उपनलकर्मियों का प्रस्ताव नहीं लाया गया। मैंने बार-बार अनुरोध किया था कि मंत्रिमंडलीय उपसमिति की रिपोर्ट बैठक रखा जाना चाहिए। इसके कुछ बिंदू छूट गए हैं। अब यह प्रस्ताव कैबिनेट की अगली बैठक लाया जाएगा।
- गणेश जोशी, कैबिनेट मंत्री, उत्तराखंड सरकार