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एक साथ दरोगा बनने निकले बाप-बेटे

Tue, 01 Jul 2014 04:05 PM IST
मनमीत रावत/ अमर उजाला, देहरादून
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देहरादून एसएसपी कार्यालय में 25 जून को एसआई भर्ती के लिए आवेदन जमा कराने के आखिरी दिन अनौखे मामले सामने आए।
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हर रोज सैकड़ों युवा आवेदन फार्म जमा करने पहुंच रहे थे। लेकिन इन कतारों में कुछ युवा ऐसे भी थे, जिन्हें अपना फार्म जमा होने के साथ अपने पापा का फार्म जमा हो जाने की भी चिंता थी।

ये युवा वे हैं, जिनके पिता 40-45 वर्ष की आयु में सैन्य सेवाओं से सेवानिवृत्त होकर घर लौट आए हैं। सेना में कड़ी नौकरी के अनुभव के बाद अब वे ग्रेजुएशन कर चुके अपने बेटों संग दरोगा बनने के लिए तैयार हैं।
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पापा और बेटों को यह मौका मिला है प्रदेश में दरोगा बनने के लिए होने वाली तीन अलग-अलग प्रक्रियाओं के एक साथ आयोजित किए जाने से।

‘पापा, टेंशन नहीं, अभी नंबर आ जाएगा’

ऋषिकेश के ढालवाला निवासी अंकित नेगी (24) एसएसपी कार्यालय में दरोगा भर्ती का फार्म जमा कराने के लिए कतार में लगे थे।

पास ही दूसरी पंक्ति में खड़े श्याम सिंह नेगी भी हाथ में भर्ती फार्म थामे हुए थे। नंबर आने में काफी देर थी। इस बीच चिलचिलाती धूप सताने लगी तो अंकित ने श्याम सिंह नेगी से कहा, ‘पापा, टेंशन नहीं, अभी नंबर आ जाएगा।’

यह सुन आसपास के लोगों के चेहरे उनकी ओर घूमे तो दोनों मुस्कुराने लगे। दरअसल, श्याम सिंह (45) आर्मी की सिग्नल कोर से रिटायर्ड हैं, जबकि उनके पुत्र अंकित हाल ही में तमिलनाडु से बीटेक कर लौटे हैं।

इस बीच दारोगा भर्ती निकली तो पिता-पुत्र एक साथ आवेदन करने निकल गए। खास बात यह है कि दोनों हर रोज सुबह साथ दौड़ लगाने जाते हैं और भर्ती के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं।

अंकित को पापा के सैन्य अनुभव से मदद भी मिल रही है। वहीं, अंकित पापा को लिखित परीक्षा की तैयारी करवा रहे हैं।

फिजिकल टेस्ट की तैयारी कर रहे साथ

बंजारावाला निवासी शंभूराम बौंठियाल (48) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है।

शंभूराम गढ़वाल रायफल से रिटायर्ड हैं। एसएसपी कार्यालय में वह भी अपने पुत्र गौरव (28) के साथ एसआई भर्ती के लिए आवेदन करने पहुंचे थे।

गौरव कोचिंग सेंटर चलाते हैं। आवेदन के बाद दोनों दौड़ समेत फिजिकल टेस्ट की तैयारी साथ कर रहे हैं। पापा को बेटे से लिखित परीक्षा की तैयारी में मदद मिल रही है।

यह हैं भर्ती प्रक्रियाएं

सीधी भर्ती: इस भर्ती में ग्रेजुएट कर चुके युवाओं को पुलिस में एसआई बनने का सीधा मौका मिलता है। इस तरह की भर्ती में आयु सीमा 28 साल रहती है। युवाओं को फिजिकल और लिखित दोनों परीक्षाओं में सफल होने के बाद मेरिट बनती है।

रैंकर भर्ती: इस भर्ती के जरिये पुलिस विभाग में तैनात कांस्टेबलों को आगे बढ़ने का मौका दिया जाता है। इनके लिए लिखित परीक्षा का आयोजन किया जाता है। यहां आयुसीमा 40 साल रहती है।

भूतपूर्व कोटा: इस भर्ती में वे पूर्व सैनिक पुलिस में एसआई बनने का अवसर पाते हैं, जो 40 वर्ष की उम्र (15 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद) में सेना से रिटायर हो चुके हों।

इस भर्ती में पूर्व सैनिकों को लिखित परीक्षा देनी होती है, हालांकि फिजिकल टेस्ट में उन्हें कुछ ढील दी जाती है।
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नहीं भाया विदेश, चाहिए टू स्टार

तन पर खाकी वर्दी, कंधों पर टू स्टार और सिर पर पी कैप पहन सब इंस्पेक्टर बनने का क्रेज दून के युवाओं में इस कदर छाया है कि उन्हें इस सपने के आगे विदेश की नौकरी भी नहीं भा रही।

तमिलनाडु के नरूल इस्लाम विवि से एयरोडायनमिक्स इंजीनियरिंग कर चुके अरुण बिष्ट ने बताया कि भारत में एयरोडायनमिक्स का स्कोप नहीं है।

बताया कि उन्हें यूरोप में प्लेसमेंट मिल गया था, लेकिन परिवार भेजने के लिए तैयार नहीं हुआ। ऐसे में दरोगा भर्ती बेहतर विकल्प लगा।

इसी तरह अभिषेक सैनी भी मलेशिया में लंबे समय तक नौकरी करने के बाद घर लौट आए हैं। अब दरोगा बनना ही उनका सपना है।

आवेदन जमा कराने वाले युवाओं में इंजीनियरिंग कर चुके, मर्चेंट नेवी में नौकरी कर चुके युवाओं की खासी तादाद देख पुलिसकर्मी भी हैरान हैं।
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