उत्तराखंड से केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजे गए सड़कों के फॉरेस्ट क्लीयरेंस के प्रस्ताव अब फास्ट ट्रैक मोड में निपटाए जाएंगे।
25 दिन में प्रदेश की सड़कों का ‘रास्ता’ साफ हो जाएगा। इसका मतलब यह हुआ कि मंत्रालय प्रदेश में किन सड़कों को अनुमति देनी है या नहीं यह स्पष्ट कर देगा।
शुक्रवार को मंत्रालय से आए एडीजी फॉरेस्ट डॉ. एसएस नेगी ने बैठक कर मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को तीन जून से प्रदेश में जिलावार कैंप लगाकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस देने को फास्ट ट्रैक काम करने को कहा है।
फास्ट ट्रैक पर होगा काम
शुक्रवार को वन अनुसंधान संस्थान (एफआरआई) स्थित वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय में बैठक हुई। डॉ. नेगी ने मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय को निर्देशित किया कि चूंकि उत्तराखंड में विकास कार्यों में मौसम सबसे बड़ी बाधा बनता है, लिहाजा यहां के सभी प्रस्तावों पर तीन जून से फास्ट ट्रैक काम किया जाए।
तीन जून से वन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी जिलावार जाकर फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मामले निपटाएंगे। पीसीसीएफ (प्रमुख वन संरक्षक) एसएस शर्मा, एपीसीसीएफ (अपर प्रमुख वन संरक्षक) एफटीएस लेप्चा, क्षेत्रीय कार्यालय के हेड अजय कुमार, अतिरिक्त सचिव फॉरेस्ट प्रसन्न पात्र, अमित नेगी, सचिव, लोक निर्माण विभाग, सीईओ कैंपा परमजीत सिंह, एसीएफ वीके सिंह, एनएच के प्रतिनिधि भी शामिल रहे।