किसान एरोमा की खेती अपनाने लगे
कृषि विभाग के आंकड़े के मुताबिक, 2001 में परती भूमि (ऐसी बंजर भूमि जिसमें पहले खेती होती थी) 1.07 लाख हेक्टेयर थी। जो 2021 तक बढ़ कर 1.91 लाख हेक्टेयर हो गई है। कृषि क्षेत्र में नए अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और प्रदेश सरकार की योजनाओं से पारंपरिक खेती में भी बदलाव आया है। जंगली जानवरों व बंदरों की समस्या से छुटकारा पाने को किसान एरोमा (सगंध पौध) की खेती अपनाने लगे हैं।
किसान सेब, कीवी के नए बगीचे तैयार कर रहे हैं। मशरूम, ड्रेगन फ्रूट, फूलों की खेती तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। कोविड महामारी से लॉकडाउन में देश-विदेश से उत्तराखंड लौटे प्रवासियों ने खेती किसान, डेयरी को आजीविका के रूप में अपनाया है।
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खेती किसानी एक ऐसा व्यवसाय है, जिसे कम बजट में शुरू किया जा सकता है। जैविक खेती के अलावा एरोमा क्षेत्र में कई युवा काम कर रहे हैं। फूड प्रोसेसिंग में कई स्टार्टअप ने बिजनेस शुरू किया है। जैविक उत्पादों और मोटे अनाजों की आज वैश्विक स्तर पर मांग रही है, जिससे इस क्षेत्र में युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। -विनय कुमार, प्रबंध निदेशक, उत्तराखंड जैविक उत्पाद परिषद