बताया गया कि वर्ष 2009 से 2011 के बीच करीब दो सौ लाइसेंस उस वक्त डीएम रहे अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर जारी कर दिए गए।
ये सब खेल डीएम कार्यालय से ही हुआ है। मामला सामने आने पर डीएम ने इस गोपनीय शिकायत को गंभीरता से लेते हुए उस दौरान जारी हुए लाइसेंसों को लेकर जांच कमेटी गठित कर दी है।
डीएम ने पुष्टि करते हुए बताया कि यदि लाइसेंस फर्जी पाए जाते हैं तो उन्हें निरस्त किया जाएगा। इसके अलावा उस दौरान तैनात रहे अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होना तय है।