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भारत के इस आश्रम ने बदल दी जुकरबर्ग की जिंदगी

Fri, 02 Oct 2015 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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सोशल मीडिया में धमाल मचाने वाली साइट फेसबुक के संस्थापक और सीईओ मार्क जुकरबर्ग को इसे ऊंचाइयों पर ले जाने प्रेरणा भारत में ही मिली थी।
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मार्क जुकरबर्ग नैनीताल जिले के कैंची धाम स्थित बाबा नीम करौली (नीब करोरी) महाराज के न केवल भक्त हैं, बल्कि कैंची धाम से मिली प्रेरणा के बाद ही फेसबुक तरक्की की इस मंजिल तक पहुंचा है। सात-आठ साल पहले स्वयं मार्क जुकरबर्ग ने कैंची धाम पहुंचकर आशीर्वाद प्राप्त किया था।

मार्क जुकरबर्ग और कैंची धाम के बीच के संबंधों का खुलासा पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सिलिकान वैली स्थित फेसबुक हेडक्वार्टर के दौरे के दौरान हुआ था। पीएम और जुकरबर्ग के बीच आध्यामिक वार्ता का दौर भी चला।
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फेसबुक बेचने का मन बना चुके थे जुकरबर्ग

इस बातचीत के दौरान फेसबुक के सीईओ ने पीएम मोदी से अपनी भारत में अध्यात्मिक यात्रा के बारे में बताया था। जुकरबर्ग ने कहा कि फेसबुक अच्छी स्थिति में नहीं था और वे काफी कोशिशों के बाद भी इसमें सुधार नहीं ला पा रहे थे।

सूत्र बताते हैं कि मार्क उस समय बहुत निराश थे। हालत यहां तक आ पहुंची थी कि मार्क फेसबुक बेचने तक का मन बना चुके थे। तभी उनके गुरु और दिग्गज तकनीकी कंपनी एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब ने उन्हें भारत में जाकर एक मंदिर में कुछ वक्त रहकर अध्यात्म की शरण में जाने की सलाह दी थी।

स्टीव से ही जुकरबर्ग को उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित कैंचीधाम आश्रम में आने की प्रेरणा मिली। उसके बाद मार्क जुकरबर्ग कैंची आश्रम पहुंचे।
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स्टीव जॉब भी थे बाबा के भक्त, 1974 में आए थे धाम

जुकरबर्ग मानते हैं कि भारत में मिली अध्यात्मिक शांति के बाद उन्हें फेसबुक को नए मुकाम पर ले जाने की ऊर्जा मिली।

मार्क जुकरबर्ग ने वर्ष 2004 में फेसबुक शुरू किया था। कैंची मंदिर के प्रबंधक विनोद जोशी बताते हैं कि वर्ष 2007-08 में मार्क जुकरबर्ग कैंची मंदिर आए थे और उन्होंने यहां विशेष पूजा-अर्चना की थी।

जोशी ने बताया जुकरबर्ग एपल के सीईओ स्टीव जाब को अपना प्रेरणास्रोत मानते थे। स्टीव जाब भी वर्ष 1974 में कैंची धाम में आए थे। जाब के कहने पर ही मार्क ने वर्ष 2007-08 में कैंची मंदिर का रुख किया और तभी से वह बाबा के भक्त बन गए।
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