400 मीटर तक पहाड़ प्रभावित
पहाड़ों में टनल निर्माण की तकनीकी को लेकर वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी में पहुंचे आईआईटी पटना के निदेशक प्रो. टीएन सिंह ने बातचीत में बताया कि टनल के निर्माण के दौरान किए जाने वाले विस्फोट से करीब 400 मीटर तक पहाड़ प्रभावित होते हैं।
हालांकि यह दूरी कम या ज्यादा हो सकती है, जो पहाड़ की स्थिरता और मजबूती पर निर्भर करती है। उन्होंने बताया कि विस्फोटक को सही जगह और स्थिति में रखे जाने से इसे कम करने का प्रयास किया जाता है। लेकिन, विस्फोट के लिए नोनल डेटोनेशन सिस्टम का इस्तेमाल होना चाहिए, जो कंपनी और ध्वनि को एक तरह से सोखता है। इससे कंपन की दूरी 100 मीटर तक सीमित रह जाती है।
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25 से 50 मिली सेकंड के अंतर पर करता है ध्वनि को नियंत्रित
प्रो. टीएन सिंह ने बताया कि नोनल तकनीक के सिस्टम में छोटे-छोटे छेद होते हैं, जो 25 से 50 मिली सेकंड के अंतर पर विस्फोट से होने वाली ध्वनि को नियंत्रित करता है। इसका राइफल आदि निर्माण में भी उपयोग किया जाता है।