साल में तीन फसलें पैदा होंगी
आमतौर पर किसान साल में दो फसलें पैदा करता है। पैदावार भी मिट्टी और इसमें की गई मेहनत व दिए गए पोषक तत्वों पर निर्भर करती है, लेकिन इस तकनीकी से साल में तीन फसलें पैदा हो सकेंगी। यहां जो फसलें पैदा होंगी, उनकी पैदावार भी ज्यादा होगी। आमतौर पर एक वर्ग मीटर जमीन पर 10 किलो टमाटर होता है तो इस तकनीकी से 20 से 25 किलो फसल होगी। किसानों की आय बढ़ जाएगी।
अभी इनकी हो रही पैदावार
चेरी टमाटर, महंगे सलाद में इस्तेमाल होने वाला लेप्यूस, पोषक तत्वों से भरपूर पालक, खीरा और रंगीन शिमला मिर्च।
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देशभर में परखी जाएगी तकनीकी, गांवों तक पहुंचाएंगे जानकारी
डीएसटी के सलाहकार प्रवीन अरोड़ा ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की। ‘अमर उजाला’ से बातचीत में उन्होंने कहा कि अब अगले चरण में बिना सौर ऊर्जा इस तकनीकी को आगे बढ़ाने पर काम होगा। नई फसलों खासतौर से फ्लोरिकल्चर का स्कोप तलाशा जाएगा। उन्होंने बताया कि अब इसका ट्रायल जम्मू कश्मीर के ठंडे इलाकों में किया जाएगा। किसानों को साथ जोड़कर उन्हें खेत, घर में इस तकनीकी से सब्जियां उगाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा।