अपने गंगा प्रेम के लिए प्रसिद्ध भाजपा की फायर ब्रांड नेता से भाजपा ही नहीं, देश की भगवा ब्रिगेड को भी बड़ी उम्मीद है।
कैबिनेट मंत्री बनी उमा भारती गंगा की शुचिता के लिए आंदोलन करती थीं, दूसरों को नसीहतें देती थीं। अब उन्हें गंगा की शुचिता बनाए रखने के लिए खुद कदम उठाने का अधिकार मिल गया है।
जल संसाधन मंत्रालय के साथ गंगा अभियान, इससे ज्यादा पसंदीदा मंत्रालय उमा भारती के लिए शायद कोई दूसरा नहीं हो सकता।
हरिद्वार के संतजगत को अब उमा से ढेर सारी उम्मीदें हैं कि अब शायद अपने कदमों से उमा गंगा को ‘तारें’। गेंद साध्वी के पाले में है।
पूरे देश में चलाया था गंगा आंदोलन
मोदी के मंत्रिमंडल में केंद्रीय जलसंसाधन और गंगा अभियान मंत्री बनाई गई उमा भारती ने गंगा को लेकर 19 मई 2011 को हरिद्वार में अनशन शुरू किया था।
उन्होंने केंद्र सरकार से गंगा को राष्ट्रीय नदी या राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने के संबंध में संसद में विधेयक पारित किए जाने की मांग की थी।
इसके लिए उन्होंने गंगा से जुडे़ सभी प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और सभी सांसदों को पत्र लिखकर सकारात्मक माहौल तैयार करने में सहयोग की अपील की थी।
उन्होंने इसे हरिद्वार ऐलान का नाम दिया था। उन्होंने हरिद्वार में 30 मई तक अनशन किया था। इसके बाद उनके आंदोलन का केंद्र दिल्ली बना था।
कैबिनेट मंत्री बनने से जगी उम्मीद
जिस गंगा को लेकर उमा भारती ने आंदोलन चलाए और अनशन किया, आज उनका मंत्रालय उनके पास आया है। मोदी सरकार में उमा भारती को गंगा अभियान मंत्री बनाया गया है। इससे हरिद्वार के संतों को उम्मीद जगी है कि अब गंगा के लिए धरातल पर काम हो पाएगा।
उमा भारती ने मई 2011 में धारी देवी को डूबने से बचाने के लिए हरिद्वार में ही आंदोलन किया था। वह कई दिन अनशन पर भी बैठी थीं। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक हरिद्वार पहुंचे थे और उन्होंने आश्वासन दिया है कि वे धारी देवी को ‘डूबने’ से बचाएंगे।
इसके बाद ही उमा ने आंदोलन का वह चरण समाप्त किया था। इसके बाद वह गंगा को राष्ट्रीय नदी घोषित करने की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गई थी।
क्या कहते हैं साधु-संत
उमा भारती का धर्मजगत से सीधा नाता रहा है। उन्हें गंगा के बारे में सब पता है। गंगा की चिंता है। अब गंगा के लिए बेहतर होने की उम्मीद जगी है।
-स्वामी कल्याणानंद सरस्वती, संस्थापक मानव कल्याण आश्रम।
उमा भारती तीर्थों और साधु-संतों की भावनाओं से अवगत हैं। उन्हें साधु-संतों की गंगा को लेकर चिंता और भावनाओं के बारे में सब पता है। उनके गंगा अभियान मंत्री बनने से सब अच्छा होने की उम्मीद है।
-महंत रविंद्र पुरी, सचिव निर्वाणी अखाड़ा।