गोबर धन योजना को धरातल पर उतारने के लिए विभाग को सहयोग कर रही ग्रामीण विकास एवं शोध संस्था के निदेशक बीएन सिंह ने बताया कि योजना में पाइप लाइन से लाभान्वित परिवारों के घरों तक गैस पहुंचाई जाएगी। प्लांट से निकलने वाली सेलरी (खाद) में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटॉस की मात्रा गोबर की तुलना में डेढ़ गुना अधिक होती है। जैविक खेती में सेलरी का प्रयोग करना किसानों के लिए बेहद लाभदायक रहता है।
और गांवों से भी मिले प्रस्ताव
परियोजना निदेशक हिमांशु जोशी ने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत पहले चरण में सलमता गांव का चयन किया गया है। सितारगंज विकासखंड के ही करघटिया, बिचुवा और रुद्रपुर के खमिया नंबर एक गांव से भी बायो गैस संयंत्र के प्रस्ताव मिले हैं। दूसरे चरण में इन गांवों में बायो गैस संयंत्र लगाने को लेकर स्वीकृति लेने सहित अन्य कार्यवाही की जाएगी।
ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कमेटी करेगी संचालन
बायोगैस प्लांट स्थापित होने के बाद उसके संचालन के लिए ग्राम प्रधान की अध्यक्षता में कमेटी गठित की जाएगी। परियोजना निदेशक के अनुसार जिन 20 परिवारों को घरेलू गैस मिलेगी, वो हर महीने तय अंशदान जमा करेंगे। यह अंशदान प्लांट की मरम्मत और अन्य कार्यों में खर्च होगा।
सितारगंज के सलमता गांव में लगने वाले सामुदायिक बायोगैस प्लांट को राज्य स्तर से स्वीकृति मिल चुकी है और केंद्र से राज्य सरकार को बजट भी मिल चुका है। इस प्लांट को स्थापित करने में 22.44 लाख रुपये खर्च होंगे और जमीन भी मिल चुकी है। तीन महीने में ही इस पर कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
-हिमांशु जोशी, परियोजना निदेशक, स्वजल