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आबकारी सिपाही को पुलिस के समान मिलें लाभ

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देहरादून। उत्तराखंड एक्साइज कॉन्सटेबल, हेड कॉन्सटेबल के नौवें द्विवार्षिक अधिवेशन में आबकारी कर्मचारियों को पुलिस की भांति लाभ देने की मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि आबकारी सिपाही विषम परिस्थितियों में चुनौतियों का सामना करते हैं। उसका जीवन भी हर समय मुश्किलों से घिरा रहता है, लेकिन उसके हितों को हमेशा नजरअंदाज किया जाता है।
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अधिवेशन में राज्य संयुक्त कर्मचारी परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष ठाकुर प्रहलाद सिंह ने आबकारी विभाग के फील्ड कर्मचारियों की वर्दी, पौष्टिक आहार वाहन भत्ता समेत तमाम मांगे गिनाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के स्थानांतरण भी नियमविरुद्ध किए गए हैं। इसके बाद बैठक में विभिन्न मांगों के संबंध में प्रस्ताव पारित किए गए। विशिष्ट अतिथि परिषद के नेता नंदकिशोर त्रिपाठी, उत्तराखंड एक्साइज कॉन्सटेबिल के प्रदेश अध्यक्ष धर्मपाल सिंह रावत, महामंत्री अनिरुद्ध शर्मा ने भी विचार रखे। अधिवेशन में महामंत्री शक्ति प्रसाद भट्ट, जिलाध्यक्ष चौधरी ओमवीर सिंह, उत्तराखंड एक्साइज कॉन्सटेबल की उपाध्यक्ष प्रीति अग्रवाल, मो. आफताब, उपमहामंत्री आशीष प्रकाश, कोषाध्यक्ष अर्जुन सिंह आदि उपस्थित रहे।
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ये रही मुख्य मांगें
-विभागीय ढांचे का पुनर्गठन हो।
-नियमविरुद्ध हुए स्थानांतरण निरस्त किए जाएं।
-दो वर्ष में सर्दी व गर्मी की वर्दी मिले।
-आबकारी के फील्ड कर्मचारियों पौष्टिक आहार की सुविधा मिले।
-चिकित्सा बिल समय पर भुगतान किया जाए।
-बकाए वाहन भत्ते का शीघ्र भुगतान किया जाए।
-रिक्त पदों पर प्रधान आबकारी सिपाही व सिपाही से प्रधान सिपाही पर पदोन्नति हो।
-आबकारी चेक-पोस्टों का सुधारीकरण किया जाए।
-पदोन्नति की समयसीमा दस वर्ष से घटाकर पांच वर्ष की जाए।
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