पूर्व आईएएस अधिकारी आरके सिंह को एक दिन का वेतन उनके खाते में भेज दिया गया है। यह राशि उस समय के वेतन के हिसाब से मात्र पौने तीन सौ रुपये बैठी है। हालांकि वेतन मिलने मात्र से नौकरी में वापसी होने के आसार बहुत कम हैं। अभी इसमें तमाम पेंच फंसे हुए हैं।
वर्ष 1984 बैच के आईएएस अधिकारी आरके सिंह उत्तराखंड के गठन से पूर्व वर्ष 1998 में दो साल की स्टडी लीव लेकर विदेश चले गए थे। इसके बाद अगले तीन साल वे एक्स्ट्रा ऑर्डनरी लीव यानी असाधारण अवकाश पर रहे। इस तरह पांच साल तक सेवा से बाहर रहने के चलते वर्ष 2003 में भारत सरकार ने नियमानुसार उनका डीम्ड रेजिग्नेशन (स्वैच्छिक इस्तीफा) मान लिया था। लेकिन, आरके सिंह ने दावा किया कि इन पांच वर्षों में एक दिन के लिए वे काम पर आए थे।
उन्होंने तर्क दिया कि इस उपस्थिति से उन पर लगातार पांच वर्ष तक अवकाश पर रहने की शर्त लागू नहीं होती है। आरके सिंह ने अपने एक दिन के वेतन की मांग की, जिसे राज्य सरकार ने स्वीकार करते हुए बीती 14 अक्तूबर को एक दिन का वेतन लगभग पौने तीन सौ रुपये जारी कर दिया।
अभी भी नौकरी में वापसी मुश्किल
गौरतलब है कि वर्ष 1983 बैच के आईएएस अधिकारी शत्रुघ्न सिंह प्रदेश के मुख्य सचिव हैं। उनके अलावा अंजली प्रसाद और भगवती प्रसाद पांडेय भी उत्तराखंड काडर में सन 1983 बैच के अधिकारी हैं। लेकिन, दोनों ही अधिकारी भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर हैं।
ऐसे में यह कवायद इसी मंशा से किए जाने की बात कही जा रही है कि वरिष्ठता के आधार पर वे मुख्य सचिव पद के लिए सबसे पहले दावेदार होंगे। वहीं सूत्रों की मानें तो भारत सरकार के स्तर पर उनके प्रकरण का निस्तारण इतना आसान नहीं है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक दिन के वेतन से पांच साल की गैरहाजिरी का क्लॉज तो पूरा नहीं होगा, लेकिन उसके बाद के तेरह सालों का जस्टिफिकेशन क्या है।
इसके अलावा वे दोबारा विदेश गए, जिसकी अनुमति का रिकॉर्ड भी नहीं है। इसके अतिरिक्त विदेश में सवैतनिक नौकरी करने समेत तमाम सवाल हैं, जो अभी भारत सरकार के स्तर से उठाए जाएंगे। इनमें से कई पर तो विभागीय कार्रवाई भी संभव है।