सैनिकों व पूर्वसैनिकों के मतों के लिए भाजपा और कांग्रेस में जंग तेज हो गई है। कांग्रेस के दो पूर्व जनरलों के खिलाफ भाजपा ने दर्जन भर पूर्व जनरलों की फौज खड़ी कर दी है।
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शनिवार को भाजपा के समर्थन में उतरे जनरलों ने मोदी-खंडूड़ी के गुणगान के साथ भाजपा को अपना समर्थन दिया। भाजपा के इस पैंतरे से अब कांग्रेस खेमे में हलचल तेज हो गई है।
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कांग्रेस को सैन्य मतों के फ्रंट पर चित करने के लिए भाजपा विधायक गणेश जोशी ने कमान संभाली है।
भाजपा के लिए प्रचार करेंगे जनरल
होटल मधुबन में भाजपा को रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचबी काला, ओपी कौशिक, एमएस गुसाईं, केएल भट्ट, पीके खन्ना, डीएसआर साहनी, ओपी कोहली, मेजर जनरल लाल जी सिंह, ब्रिगेडियर पीके गुरुंग सहित कई अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों ने समर्थन दिया। ये सभी जनरल भाजपा के लिए प्रचार करेंगे।
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इस मौके पर जनरल गुसाईं ने कहा कि नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक संबोधन से साफ हो रहा है कि पूर्व सैनिकों के हितों का संरक्षण भाजपा सरकार करेगी। उनके चुनावी घोषणा पत्र में वन रैंक वन पेंशन लागू करना का स्पष्ट जिक्र है।
जनरल ओपी कौशिक ने कहा कि जनरल बीसी खंडूडी का केंद्र में मंत्री और राज्य में मुख्यमंत्री का कार्यकाल खुद में एक मिसाल है। उन्होंने बतौर सीएम पूर्व सैनिकों के लिए जो योजनाएं राज्य में लागू की कांग्रेस उससे अधिक कुछ नहीं कर पाई।
अन्य फ्रंट पर घेरा यूपीए को
रिटायर्ड आर्मी कमांडर जनरल एचबी काला ने कहा कि पूर्व सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन के अलावा कई बेहद संवेदनशील मुद्दे हैं जिनसे सेना हर फ्रंट पर झेल रही है। रक्षा नीति में भारी बदलाव की जरूरत है।
हथियार का नवीनीकरण, हादसों का बढ़ना और आतंकवाद एक बड़ी चुनौती है जिसे निपटने में यूपीए सरकार कामयाब नहीं हुई है।
गढ़वाल में सबसे उच्च रैंक से रिटायर जनरल काला को इस बात का मलाल है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा से मिलने गए तो उनके पास मिलने तक का समय नहीं था।
वन रैंक वन पेंशन पर साधा निशाना
जनरलों ने एक सुर में यूपीए सरकार को अब तक समान पेंशन नहीं होने के लिए कटघरे में खड़ा किया। जनरल साहनी ने कहा कि अब तक पांच बार यूपीए सरकार वन रैंक वन पेंशन देने की बात कर चुकी है।
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चुनाव से ठीक पहले अंतरिम बजट में वन रैंक वन पेंशन को लागू करने की बात कर सिर्फ चुनावी स्टंट खेला गया। अभी तक पेंशन का ढांचा तैयार नहीं हुआ है और न ही कोई आदेश जारी किया है जबकि एक अप्रैल 2014 से इसे लागू किया जाना था।
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जनरल लाल ने बताया कि जितना फंड इसके लिए आरक्षित किया है उससे समान पेंशन संभव नहीं है।