सोशल मीडिया पर वायरल इस संदेश के बहाने सेना और अर्द्ध सैनिक बलों से सेवानिवृत्त जवानों और उनके परिजनों व सैन्य विधवाओं के दर्द के पन्ने खुल गए हैं। कहा जा रहा है कि तमाम सैनिक विधवाओं को पेंशन हासिल करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। विभिन्न अदालतों और ट्रिब्यूनल से उनके पक्ष में यदि फैसले आ रहे हैं तो रक्षा मंत्रालय सर्वोच्च न्यायालय में उनके खिलाफ अपील कर रहा है।
जिन मामलों ऊंची अदालत से सैन्य विधवाओं के पक्ष फैसले हो रहे हैं, उसी तरह के मामलों में उन्हें लागू नहीं किया जा रहा है। सैन्य विधवाओं को अदालतों में जाने को मजबूर किया जा रहा है। रिटायर्ड फौजी अफसर नवदीप राष्ट्र प्रेमी जनता से अपील कर रहे हैं कि और केंद्र सरकार को पोस्ट कार्ड भेजकर अपील करें कि वे सर्वोच्च न्यायालय में दर्ज अपीलों को वापस लें।
जनता की इस पहल से सरकार पर दबाव बनेगा। वे उन पूर्व फौजियों की डिसएबिलिटी पेंशन के लिए भी केंद्रीय नेताओं को पत्र लिखकर यह अपील करें कि जिनके पक्ष में आए अदालती फैसलों के खिलाफ सरकार सर्वोच्च न्यायालय में गई है, उन्हें वापस लिया जाए।
जनता पर नवदीप की अपील का असर कितना है, ये तो नहीं मालूम लेकिन इस बहाने उन्होंने पूर्व फौजियों, सैन्य विधवाओं और उनके प्रभावितों के उन जख्मों को उकेर दिया है, जिनके लिए सरकारी तंत्र को जिम्मेदार माना जा रहा है।
पूर्व सैनिकों के मसलों को सुलझाने के लिए वैसे तो कई मंच हैं। लेकिन उसके बावजूद सेवानिवृत्ति के बाद जवानों, उनके परिजनों और सैनिक विधवाओं को मदद नहीं मिल पा रही है। उनमें नाराजगी है। मेरे पास हजारों की संख्या में पूर्व सैनिक आते हैं, जिनकी पेंशन से संबंधित समस्याएं होती हैं। कई मामलों में अदालतों में जीतने के बाद पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों को लाभ मिल पाए। लेकिन सरकारें ऐसे ही मामलों को नजीर नहीं मानती बल्कि अदालतों में जाने को मजबूर करती है। सैनिक परिवारों और पूर्व फौजियों को हक दिलाने में जनता की ताकत अहम भूमिका निभा सकती है।
- ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) आरएस रावत, प्रदेश अध्यक्ष, पूर्व सैनिक कल्याण संघ
मेजर नवदीप की अपील एकदम सही है। सेना या अर्द्धसैनिक बलों में जवान जब भर्ती होता है तो सेवा के दौरान उसके अफसर उसका ध्यान रखते हैं। लेकिन जब वह रिटायर्ड होकर आता है तो अधिक पढ़ा-लिखा न होने के कारण वह अपनी पेंशन व अन्य लाभों के संबंध में बहुत जानकारी नहीं रखता। कई बार सेवा के दौरान वह अपने परिवार के लोगों के बारे में सही सूचनाएं नहीं दे पाता, जिससे बाद में उसे कई परेशानी होती है। वो आम नागरिकों की तरह संगठित भी नहीं होता।
- कर्नल नरेंद्र रावत (सेवानिवृत्त)