देहरादून। कहने का राज्य को ऊर्जा प्रदेश का दर्जा दिया गया है, लेकिन ऊर्जा प्रदेश में न तो आम उपभोक्ताओं को 24 घंटे बिजली उपलब्ध है और न ही उद्योगों को। ऐसे में दून में ही उद्योगों को हर दिन करीब डेढ़ से दो करोड़ का नुक सान उठाना पड़ रहा है। बिजली कटौती से सबसे ज्यादा असर फार्मा उद्योग, पैकेजिंग उद्योग, फूड प्रोसेसिंग जैसे उद्योगों पर पड़ रहा है। उद्योग संगठनों के अनुसार रोजाना औसतन तीन से चार घंटे की बिजली कटौती होती है।
दून के सेलाकुई, लांघा रोड, श्यामपुर, मोहब्बेवाला, लालतप्पड़ आदि औद्योगिक क्षेत्रों में बड़ी संख्या में फार्मा, फूड प्रोसेसिंग, पैकेजिंग आदि औद्योगिक इकाइयां हैं। दून में औद्योगिकरण को बढ़ावा देने के लिए नियामक आयोग और राज्य सरकार ने 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने के निर्देश यूपीसीएल को दिए हैं। इसके बावजूद यूपीसीएल निर्बाध रूप से 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने में नाकाम है। एक अनुमान के मुताबिक बिजली कटौती से हर रोज इन उद्योगों को डेढ़ से दो करोड़ का नुकसान पहुंच रहा है।
औद्योगिक क्षेत्र श्यामपुर में जुलाई में 127 बार हुई कटौती
औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था किस कदर है। इसका उदाहरण श्यामपुर औद्योगिक क्षेत्र की में जुलाई माह में बिजली की कटौती से लगाया जाता है। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने बताया कि जुलाई माह में श्यामपुर क्षेत्र में 127 बार बिजली कटौती हुई है। इससे यहां करोड़ों का नुकसान हुआ है। इसके साथ ही सेलाकुई, लांघारोड, लालतप्पड़, मोहब्बेवाला में भी हर रोज तीन से चार घंटे की कटौती गई।
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औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली कटौती की समस्या लगातार जारी है। औद्योगिक संगठन लगातार इस मुद्दे को हर स्तर पर उठाते रहते हैं, लेकिन फिर भी उद्योगों को 24 घंटे बिजली उपलब्ध नहीं हो पा रही है। लगातार बिजली कटौती से उद्योगों को हर रोज डेढ़ से दो करोड़ का नुकसान उठाना पड़ता है। सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।
-पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड