कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होने से ऊर्जा कामगार संगठन ने ऊर्जा के तीनों निगमों में आंदोलन का एलान किया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि शांतिपूर्ण आंदोलन से भी प्रबंधन ने सकारात्मक रुख नहीं दिखाया तो वे हड़ताल जैसा कदम उठाने को मजबूर होंगे।
प्रांतीय महामंत्री विजय बिष्ट ने संगठन की बैठक में हुए निर्णय की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ऊर्जा के निगम प्रबंधनों की हठधर्मिता के चलते कार्मिकों की कई मांगें लंबे समय से अटकी हुई हैं।
अधिकारी सिर्फ आश्वासन और झूठे तथ्य पेश कर कर्मचारियों को गुमराह कर रहे हैं। लिहाजा कर्मचारियों को चरणबद्ध आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
इसके तहत कर्मचारी 20 से 27 अप्रैल तक काला फीता बांधकर काम करेंगे। दो से सात मई तक तीनों निगमों में खंड और मंडल स्तर पर गेट मीटिंग की जाएगी।
छह जून को सचिवालय तक विशाल रैली निकाल मुख्यमंत्री और प्रमुख सचिव ऊर्जा को ज्ञापन सौंपेंगे। 20 जूून को धरना और सत्याग्रह किया जाएगा। इसके बाद भी प्रबंधन ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो हड़ताल की रणनीति बनाई जाएगी।
ये हैं प्रमुख मांगे:
- नान फंक्शनल ग्रेड वेतन को समाप्त किया जाए
- छठे वेतन आयोग से हुई वेतन विसंगतियों को दूर किया जाए
- चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों का न्यूनतम ग्रेड वेतन 2400 किया जाए
- तकनीकी और लिपिकीय संवर्गों में शीघ्र भर्ती की जाए
- समयबद्ध वेतनमान की व्यवस्था पहले की तरह रखी जाए
- आशुलिपिक संवर्ग की पदोन्नति में आ रही विसंगतियों को दूर किया जाए
- उपनल और स्वयं सहायक समूह के कार्मिकों को वरिष्ठता के अनुसार नियमित किया जाए
- नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक समान कार्य का समान वेतन दिया जाए