भारत-नेपाल सीमा पर करीब दो दशक बाद लुप्तप्राय गिद्ध की दुर्लभ प्रजाति अचानक दिखने से वन महकमे के साथ ही पक्षी प्रेमियों की प्रसन्नता बढ़ी है।
दिखे दर्जन भर गिद्ध
हिमालयन प्रजाति के दर्जन भर गिद्ध नदन्ना से पहेनियां नहर पटरी के पास जामुन के पेड़ों में देखे जा रहे हैं। गिद्ध नहर पटरी पर पड़े मृत पशु के शव पर नजरें जमाए हुए मिले हैं।
सरकार द्वारा दुर्लभ प्रजाति के गिद्धों के संरक्षण की वल्चर प्रोटेक्शन योजना अभी धरातल पर नहीं आयी है। अलबत्ता, सीमांत क्षेत्र में अचानक हिमालयन ग्रिफान गिद्ध देखे गए हैं।
वर्षों बाद इनके आगमन से पक्षी प्रेमी के साथ-साथ वन विभाग के अधिकारी भी खुश हैं। वन दरोगा जशोद सिंह एवं वन महकमे के अधिकारियों ने दुर्लभ गिद्धों में से हिमालयन ग्रिफान के नखाताल जंगल में दिखने की पुष्टि की है।
लुप्तप्राय गिद्धों में हिमालयन ग्रिफान, यूरेसियन ग्रिफान, सिनेरियस, राज, लंबी गर्दन वाला, सफेद पीठ वाला और ईजिप्शियन शामिल है।
खटीमा एवं सुरई वन रेंज के वन क्षेत्राधिकारी टीएस शाही और यूडी कांडपाल मृत पशुओं में रासायनिक दवाओं एवं प्रदूषित वातावरण को गिद्धों के लुप्त होने का प्रमुख कारण मानते हैं।
अन्य गिद्धों से छोटी होती है इसकी गर्दन
उप प्रभागीय वनाधिकारी राजेश श्रीवास्तव बताते हैं कि हिमालयन ग्रिफान गिद्ध की गर्दन औसत अन्य गिद्धों से कम लंबी होती है। यह गिद्ध हिमालयी क्षेत्रों में रहते हैं। यह गिद्ध वर्ष 1990 के दशक के बाद अब इस क्षेत्र में नजर आया है।
सूंघने की विलक्षण शक्ति होती है गिद्धों की
लुप्त प्रजाति के गिद्धों में देखने एवं सूंघने की विलक्षण शक्ति होती है। लगभग 10 कोस तक फैलने वाली गंध एवं दुर्लभ पानी को गिद्ध घने बीहड़ों के ऊंचे पेड़ों पर बैठकर पता लगा लेते हैं।
आयुर्वेदिक एवं घरेलू उपचार के जानकार गिद्ध के पंखों एवं कंकाल को रामबाण बताते हैं।