फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सातवें वेतन आयोग पर कर्मचारी संगठनों में उबाल, करेंगे हड़ताल

Fri, 01 Jul 2016 02:39 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
Protest
विज्ञापन
सातवें वेतन आयोग में मांगें न मानें जाने से केंद्रीय विभागों की यूनियनों का गुस्सा फूट पड़ा है। बृहस्पतिवार को सुबह से देर रात तक यूनियनों के प्रदेश और केंद्रीय पदाधिकारियों ने बैठकें की और यह तय किया कि केंद्र सरकार अगर नहीं मानेगी तो 11 जुलाई से देश व्यापी हड़ताल तय है। रेलवे कर्मचारी चक्का जाम करेंगे। केंद्रीय यूनियनों का कहना है कि सातवें वेतन आयोग ने गच्चा दिया है। मशविरे में केंद्रीय यूनियनों को शामिल नहीं किया गया।
विज्ञापन


केंद्र सरकार के विभागों की यूनियनों का कहना है कि छठवें वित्त आयोग की जिन सिफारिशों का विरोध किया गया था मोदी सरकार के निर्देश पर गठित सचिव स्तरीय कमेटी ने उन सिफारिशों को जस का तस पास कर दिया है। इससे केंद्रीय कर्मचारियों को धक्का लगा है।

महालेखाकार एसोसिएशन के अध्यक्ष बीसी ध्यानी और आयकर कर्मचारी महासंघ के सचिव डीएस रावत का कहना है कि केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन 18 हजार से बढ़ाकर 26 हजार करने की मांग की थी, लेकिन इसे नकार दिया गया।
विज्ञापन


बेसिक वेतन में 50 फीसदी डीए शामिल करने की मांग भी नहीं मानी गई। साढ़े तीन हजार रुपये सालाना बोनस से सीलिंग हटाने की मांग की गई थी, वह भी दरकिनार हो गई है। एचआरए घटा दिया गया है। सेवा काल में वरिष्ठता के आधार पर तीन के स्थान पर पांच पदोन्नति की मांग की गई थी। सातवें वेतन आयोग में इसका भी प्रावधान नहीं किया गया है। आल इंडिया डिफेंस इम्प्लाइज फेडरेशन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य जगदीश चंद्र छिमवाल ने सातवें वेतन आयोग को निराशाजनक बताया।

महासंघों का 11 जुलाई से हड़ताल का एलान

हड़ताल - फोटो : Demo pic
छिमवाल का कहना है कि पहली बार सरकार ने अपने कर्मचारियों के महासंघों को वार्ता में शामिल नहीं किया। इस पर दुष्प्रचार किया जा रहा है कि बढ़ोतरी हो गई है। संयुक्त सलाहकार समिति की राय नहीं ली गई। 11 जुलाई से हड़ताल तय है।

नार्दन रेलवे मेंस यूनियन के मंडल सहायक सचिव उग्रसेन सिंह का कहना है कि सातवें वेतन आयोग ने भत्तों की संख्या कम कर दी। आवास भत्ता घटा दिया है। ट्रेड यूनियनों से बात भी नहीं की गई। वेतन आयोग के मामले में संगठनों में दिन भर बैठकों का दौर चला। प्रांतीय इकाइयां अपनी केंद्रीय कार्यसमिति से दिशा-निर्देश लेती रहीं।

वेतन आयोग से विज्ञानियों को भी मलाल
सातवें वेतन आयोग से वन विज्ञानियों को भी मलाल है। ऑल इंडिया फारेस्ट साइंटिस्ट एसोसिएशन ने जो मांगें वेतन आयोग में शामिल किए जाने के लिए भेजी थीं, उन्हें नहीं माना गया है। एसोसिएशन के चेयरमैन वरिष्ठ विज्ञानी डा. सुधीर कुमार का कहना है कि एचएजी हायर स्केल लागू किया जाना था, लेकिन नहीं किया गया।

पुराने वेतनमान में जो 60 से 70 हजार स्केल दिया गया था, इसे 10 हजार रुपये तक सीमित कर दिया गया है। वन विज्ञानियों का बेसिक ग्रेड पे 10 हजार रुपये तक सीमित कर दिया है। इसे बढ़ाने की मांग की गई थी।
विज्ञापन

प्रांतीय इकाइयों के पदाधिकारी दिल्ली गए

खाली बटुअा
सातवां वेतन आयोग आने के बाद केंद्र सरकार के कई विभागों की यूनियनों के प्रांतीय पदाधिकारी दिल्ली बुलाए गए हैं। कें द्रीय कार्यसमिति ने वेतन आयोग की सिफारिशों का बारीकी से अध्ययन शुरू कर दिया है।

सर्वे आफ इंडिया के (ग्रुप बी गजटेड) आफीसर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनूप अग्रवाल और महासचिव उमेश मिश्र ने बताया कि आल इंडिया सेंट्रल एग्जीक्यूटिव कमेटी में चर्चा की जाएगी कि कौन सी मांगें विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को भेजी गई थीं और उनमें कितनी मानी गई हैं। इसके अलावा अन्य केंद्रीय यूनियनों के प्रांतीय पदाधिकारियों ने दिल्ली जाकर केंद्रीय कार्यसमितियों की बैठक में शिरकत की।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें