देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फार्मास्यूटिकल साइंसेज की आरे से आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का शुक्रवार को शुभारंभ किया गया। दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन नवोदित फार्मासिस्टों में अनुसंधान, उद्यमिता और कौशल बढ़ाने की संस्कृति विकसित करने पर मंथन किया गया।
उद्योग और अकादमिक जगत के बीच अंतर को पाटना फार्मास्यूटिकल साइंसेज का सतत भविष्य विषय पर आयोजित सम्मेलन का शुभारंभ यूकोस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत ने बतौर मुख्य अतिथि किया। उन्होंने भारत की वैज्ञानिक पारिस्थितिकी को मजबूत बनाने में समन्वय और नवाचार-आधारित सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। सम्मेलन में उत्तराखंड व देश के विभिन्न राज्यों की विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया। एपीटीआई के अध्यक्ष प्रो. मिलिंद जनराव उमेकर ने कहा, ऐसे सम्मेलन छात्रों को वास्तविक दुनिया की अपेक्षाओं को समझने में सक्षम बनाते हैं, जबकि उद्योग को शैक्षणिक अनुसंधान क्षमता से लाभ मिलता है। शिक्षा विनियमन समिति के अध्यक्ष प्रो. दीपेंद्र सिंह ने कहा, शैक्षणिक संस्थानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वयं को ढालना चाहिए और छात्रों को नवाचार-आधारित पेशेवर भूमिकाओं के लिए तैयार करना चाहिए। इस मौके पर विवि के कुलपति डाॅ. प्रथप्पन के पिल्लई, डाॅ. दिव्या जुयाल, प्रो. रोहित दत्त, प्रो. योगेश जोशी, प्रो. जी ज्ञानराजन, अजय सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे।