इस दौरान महिलाओं को कहीं भागने का रास्ता नहीं मिला। कुछ क्षण के लिए कीर्तन रुका तो हाथी गांव में प्रवेश कर गया। गनीमत यह रही कि हाथी ने किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। ये नजारा देखते ही जो जहां था वहीं ठिठक कर रहा गया। लोग सन्नाटा खींचे अपनी-अपनी जगह पर बैठे रहे। कुछ देर बाद शोर मचाकर गजराज को जंगल की ओर दोबारा रुख करने पर मजबूर किया गया।
उन्होंने वन विभाग से मांग की है कि जंगली हाथियों को गांव में प्रवेश करने से रोकने के लिए खदरी गांव की सीमा पर खाई खुदान की जाए। आधी रात को हाथी के गांव मे घुस आने के दौरान मंदिर पुजारी सोहन लाल, राय सिंह, मान सिंह, राम प्रसाद, कुंदन सिंह, गणेश सिंह, केशव, गोपाल, सत्य प्रकाश, मदन सिंह, बलबीर सिंह, लीलावती देवी, रजनी पटवाल, विरोजनी देवी, नंदी देवी, रामेश्वरी देवी, पीतांबरी देवी आदि हाथी को भगाने में मदद की।