चीन सीमा से उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ जिले के 60 गांव आज भी अंधेरे में हैं। सामरिक महत्व के इन क्षेत्रों तक विद्युत लाइनें पहुंचने से बार्डर एरिया डेवलेपमेंट प्लान (बीएडीपी) के तहत होने विकास कार्यों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी में इसका खुलासा हुआ है।
दूधली निवासी अजय कुमार ने उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) से जानकारी मांगी थी कि प्रदेश के कितने गांवों में आज भी बिजली नहीं है। अधिशासी अभियंता (परियोजना) अरुण कांत की ओर से जो जानकारी दी गई वह चौंकानी वाली है।
चीन सीमा से सटे उत्तरकाशी जिले के 31 और पिथौरागढ़ के 29 गांव आज भी बिजली से अछूते हैं। अल्मोड़ा के चार, बागेश्वर के दो, चंपावत का एक, पौड़ी गढ़वाल के दो, रुद्रप्रयाग का एक और रुद्रप्रयाग के छह गांवों में आज भी केंद्र और राज्य की सरकारें बिजली नहीं पहुंचा पाई हैं। आरटीआई कार्यकर्ता अजय कुमार का कहना है कि सुरक्षा और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इन गांवों में आजादी के छह दशक बाद भी बिजली न पहुंचाया जाना चिंता का विषय है।
यूपीसीएल के प्रवक्ता मधुसूदन ने बताया कि इन गांवों में पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत बिजली पहुंचाई जानी है। केंद्र ने यूपीसीएल को पहली किश्त में 88 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। जो गांव अक्सर हिमाच्छादित रहते हैं, उनको सोलर लाइट से जगमग किया जाएगा। कुछ गांवों के लिए टेंडर भी हो गए हैं। इन पर तेजी से काम किया जाएगा।