राजधानी देहरादून में आंदोलित संविदा विद्युत कर्मियों ने कड़े तेवर अपना लिये है। दीपावली से ठीक एक दिन पहले सुबह पांच बजे चार विद्युत संविदा कर्मी विधानसभा के पास स्थित एक टॉवर पर चढ़ गए। सूचना मिलने के बाद सुबह आठ बजे तक मौके पर बड़ी संख्या में विद्युत संविदा कर्मी मौके पर पहुंच गए थे। भारी संख्या में पुलिस फोर्स की भी तैनाती कर दी गई थी। अपर जिलाधिकारी प्रशासन हरक सिंह रावत ने संविदा कर्मियों से बात की, लेकिन वे अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए है।
खाने पीने का कोई सामान नहीं
टॉवर पर चढ़ने वालों में कंचन जोशी, रणधीर पुंडीर, दर्शन भंडारी और कोस्तुरबा नंद पांडे शामिल है। इसमें से रणधीर पुंडीर घायल है। उसे दिन में तेज बुखार भी था। पूरे दिन सभी चार संविदा कर्मी भूखे रहे। ये सभी अपने साथ खाने पीने के लिए कोई भी समान लेकर नहीं टॉवर पर नहीं चढ़े हैं।
वार्ता करने के लिए कोई नहीं पहुंचा
संविदा कर्मियों के आंदोलन को धार देने के लिए भाजपा नेता रवींद्र जुगरान, यूकेडी के नेता शांति प्रसाद भट्ट और लताफत हुसैन मौके पर पहुंच गए। दिन भर टॉवर के नीचे संविदा कर्मी जमे रहे। सरकार, साकेत और ऊर्जा क्षेत्र के तीनों निगम प्रबंधकों के खिलाफ नारेबाजी होती रही। सरकार की ओर से वार्ता करने के लिए कोई नहीं पहुंचा। इससे संविदा कर्मियों में और आक्रोश था। उनका कहना था कि संविदा विद्युत कर्मियों की उपेक्षा आगामी लोकसभा चुनाव में प्रदेश सरकार को भुगतने के लिए तैयार रहना होगा।
खुद पर डाला पेट्रोल
एक विद्युत संविदा कर्मी शाम को साढ़े पांच बजे अचानक अपने ऊपर पेट्रोल डाल दिया। इससे धरना में बैठे संविदा विद्युत कर्मियों में हड़कंप मच गया। संविदा कर्मी और पुलिस के बीच बचाव के कारण वह आग लगा पाने में सफल नहीं हो पाया।
सुबोध के अपशब्द से हार्ट अटैक
लगभग 50 से अधिक विद्युत संविदा कर्मी विधायक सुबोध उनियाल के घर पर प्रदर्शन करने पहुंच गए। इस दौरान उनियाल के खिलाफ नारेबाजी भी की। उनियाल अपने छत के ऊपर चढ़कर संविदा कर्मियों को जमकर अपशब्द बोले।
इससे गोविंद सिंह रावत नाम के एक संविदा कर्मी का मौके पर ही हार्ट अटैक पड़ गया। उसे संविदा कर्मियों ने आटो करके दून अस्पताल पहुंचाया, जहां इलाज चल रहा है। यहां बता दें कि 14 मार्च 2013 को त्रिपक्षीय समझौता हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर सुबोध उनियाल ने विद्युत संविदा कर्मियों की मांग को तीन माह में पूरा कराने आश्वासन दिया था। तब से आठ महीने की अवधि बीत गई, लेकिन उनकी मांगों पर गौर ही नहीं किया गया।
अध्यक्ष की भी हालत खराब
उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष योगेंद्र विश्राल की स्थिति भी खराब हो गई। देर शाम विश्राल के मुंह से आवाज निकल रही थी और न ही चला जा रहा था। संविदा कर्मियों ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया।
तीन हजार परिवारों की दिवाली खराब
तीन हजार से अधिक विद्युत संविदा कर्मियों की दीवाली खराब हो गई है। उनकी सुध लेने के लिए ऊर्जा निगम, पिटकुल, यूजेवीएनएल, शासन और सरकार तक सुध लेने के लिए तैयार नहीं है। सर्दी की रात में आंदोलनकारी पिछले कई दिनों से खुले आसमान के नीचे रात गुजार रहे हैं, लेकिन कोई सुध लेने वाला नहीं है।