भाजपा के प्रधानमंत्री दावेदार नरेंद्र मोदी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी वेबसाइटों पर अपने भाषणों में घुमा-फिराकर भूख को जरूर लाते हैं।
मोदी के टी स्टालों पर वीडियो टॉक में गरीबों का जिक्र बार-बार आता है। यही बात राहुल गांधी आंकड़ों के साथ पेश कर रहे हैं।
गरीबों के मसीहा
सोशल साइटों पर नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी को गरीबों का मसीहा बनाकर दिखाया जा रहा है।
दिलचस्प यह है कि चुनावों में सुबह से शाम तक लाइन लगाकर वोट देने वाले आम वोटरों को साइबर जंग का कुछ पता ही नहीं है, जबकि मार्केटिंग उन्हीं के हालात की हो रही है।
सेलाकुई से कांग्रेस भवन पानी की समस्या लेकर आए विनोद बिष्ट, दिनेश थापा ने कहा कि उनके फोन पर इंटरनेट नहीं है।
न ही कभी फेसबुक देखा है। उन्हें पानी चाहिए। लनतरानी समझ नहीं आती।
साइबर जंग में फेसबुक, ट्विटर बने असलहे
दोनों दलों ने आम कार्यकर्ताओं को साइबर जंग मजबूत करने का लक्ष्य भी दे रखा है। भाजपा महानगर कार्यालय में बैठक के दौरान हर कार्यकर्ता से फेसबुक और ट्विटर अकाउंट बनाने को कहा गया है।
एक कार्यकर्ता को फेसबुक पर 20 फ्रेंड बनाने का लक्ष्य है। ट्विटर पर फॉलोइंग बढ़ाने के निर्देश हैं। कांग्रेस भवन में चल रहा आईटी सेल अधिक से अधिक फेसबुकिया फ्रेंड जुटाने में लगा है।
वेबसाइटों पर चलने वाले नेताओं के भाषणों के कटपीस भाजपाई और कांग्रेसी अपने फ्रेंड्स को टैग कर दे रहे हैं।