उत्तराखंड में 17 लाख लोगों के लिए अपना घर सपना भर है। इनमें से 12.50 लाख लोग तो किराये के घरों में गुजर-बसर कर रहे हैं।
उत्तर प्रदेश से भी खराब हैं हालात
बाकी के साढ़े चार लाख लोग सराय, धर्मशाला और झुग्गी-झोपड़ी में जिंदगी बसर करते हैं। हैरत की बात यह है कि इस मामले में उत्तराखंड के हालात अपने पड़ोसी और काफी बड़े राज्य उत्तर प्रदेश से भी ज्यादा खराब हैं।
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हिमाचल प्रदेश भी उत्तराखंड से बेहतर स्थिति में है। दोनों राज्यों में अपेक्षाकृत ज्यादा प्रतिशत लोगों के पास अपने मकान हैं। रोटी, कपड़ा और मकान कभी प्रचलित चुनावी नारा था।
महाकवि अज्ञेय से शब्द उधार लेकर कहा जाए तो ‘मकान’ के तो देवता ही कूच कर गए। 2011 के जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक राज्य गठन से आज तक बढ़ती आबादी की मूल जरूरत को नजरअंदाज किया जा रहा है।
‘सुकून भरी छत’ का वादा सिरे से गायब
इस बार के लोकसभा चुनाव में भी इस मुद्दे से कन्नी काटने की भरपूर कोशिश की जा रही है। राजनीतिक दलों के घोषणापत्रों में आम जनता के लिए ‘सुकून भरी छत’ का वादा सिरे से गायब है।
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इसके उलट माननीयों को अपनी चिंता बराबर रही। उत्तराखंड गठन के बाद से ही प्रदेश में विधायकों को राजधानी में घर बनाकर देने की कवायद की जाती रही है।
लेकिन माननीयों को यह नहीं दिख रहा है कि प्रदेश की एक बड़ी आबादी राज्य गठन के बाद भी अपने घर के लिए तरस रही है।
सपा ने तो एक कदम बढ़कर यह कह दिया कि चुने गए प्रतिनिधियों को उनके संसदीय क्षेत्र में घर बनाकर दिया जाएगा।
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कांग्रेस ने अभी तक मलिन बस्तियों को नियमित करने की बात तो की है पर किराये के घरों में गुजर-बसर कर रहे 12 लाख लोगों के आशियानों के कोई योजना पेश नहीं की।
यही हाल भाजपा और अन्य दलों का भी है। इसके उलट माननीयों ने अपने लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। गैरसैंण में विधानभवन बनाया जा रहा है तो मंत्रियों से लेकर सभापति आदि सब के लिए अलग से आवास की व्यवस्था का प्रावधान है।
विधायकों के लिए निवास की व्यवस्था
अस्थायी राजधानी देहरादून में प्रस्तावित विधान भवन के साथ सभी विधायकों के लिए आवास की व्यवस्था की जा रही है। सदन में हर बार राजधानी में विधायकों को प्लॉट मुहैया कराने या फिर घर बनाकर देने की मांग की जाती रही है।
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रायपुर में नए विधानभवन में विधायकों के लिए निवास की व्यवस्था की गई है। गैरसैंण में मुख्यमंत्री, मंत्रियों, स्पीकर आदि के लिए आवास की व्यवस्था का प्रावधान है।
अपनी-अपनी चिंता
- यमुना कॉलोनी में सरकारी बंगले को लेकर कृषि मंत्री हरक सिंह रावत और नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट के बीच विवाद रहा।
- मुख्यमंत्री हरीश रावत इस समय मुख्यमंत्री के लिए तय आवास के बजाय बीजापुर अतिथि गृह में रह रहे हैं।
- किशोर उपाध्याय को जबरन कोठी खाली करनी पड़ी।